मालेगांव: तीन साल की मासूम के रेप-हत्या पर फूटा जनाक्रोश, सत्र न्यायालय पर भीड़ का हंगामा, फांसी की मांग के बीच शहर बंद। 

महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव तहसील में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। डोंगराले गांव में 16 नवंबर 2025 को

Nov 22, 2025 - 12:09
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मालेगांव: तीन साल की मासूम के रेप-हत्या पर फूटा जनाक्रोश, सत्र न्यायालय पर भीड़ का हंगामा, फांसी की मांग के बीच शहर बंद। 
तीन साल की मासूम के रेप-हत्या पर फूटा जनाक्रोश, सत्र न्यायालय पर भीड़ का हंगामा, फांसी की मांग के बीच शहर बंद। 

महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव तहसील में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। डोंगराले गांव में 16 नवंबर 2025 को तीन साल की एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद क्रूर हत्या कर दी गई। आरोपी 24 वर्षीय रविंद्र खैरनार ने बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ बलात्कार किया और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। यह जघन्य अपराध न केवल परिवार को तोड़ गया, बल्कि पूरे समाज में गुस्से की लहर पैदा कर दी। गुरुवार को सत्र न्यायालय के बाहर लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। हजारों की संख्या में जमा भीड़ ने आरोपी को तत्काल फांसी देने की मांग की, कोर्ट के गेट पर चप्पलें फेंकीं और दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। पुलिस को हल्की लाठीचार्ज करनी पड़ी।

घटना उस दिन दोपहर में घटी, जब बच्ची अपने घर के आसपास खेल रही थी। ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी रविंद्र खैरनार गांव का ही रहने वाला है। वह बच्ची के पिता से एक महीने पहले झगड़ा कर चुका था। पुलिस का मानना है कि इसी पुरानी दुश्मनी के चलते उसने बदला लेने के लिए यह कृत्य किया। बच्ची को लालच देकर खेतों की ओर ले गया, जहां उसने अपराध किया। हत्या के बाद लाश को आरोपी के घर के पास एक मोबाइल टावर के नीचे छिपा दिया। शाम तक बच्ची के लापता होने की खबर फैल गई। परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन जब कुछ नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी। रात में सर्च ऑपरेशन चला, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने भी मदद की। अगले दिन सुबह लाश मिली, जो खून से सनी हुई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि दुष्कर्म के बाद सिर पर पत्थर से कई वार किए गए थे। यह देखकर डॉक्टरों के भी होश उड़ गए।

पुलिस ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में खैरनार ने अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह डर रहा था कि कृत्य का पर्दाफाश हो जाएगा, इसलिए हत्या कर दी। नाशिक ग्रामीण पुलिस ने केस को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक जांच में कोई अन्य सहयोगी न मिलने के बावजूद, पुलिस सभी संभावनाओं की पड़ताल कर रही है। हत्या का हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है। एसपी बलासाहेब पाटिल ने कहा कि जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। आरोपी को POCSO एक्ट और हत्या के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ग्रामीणों ने सोमवार को ही सड़क जाम कर विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने लाश को अंतिम संस्कार के लिए लेने से इनकार कर दिया, जब तक फांसी का वादा न हो। पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत किया।

गुरुवार को स्थिति और बिगड़ गई। आरोपी को सत्र न्यायालय में पेश करने की खबर पर महिलाएं और युवा सड़कों पर उतर आए। राम सेतु से शुरू हुई विरोध रैली सीधे कोर्ट पहुंची। भीड़ ने नारे लगाए, हमारी बेटी को न्याय दो, दरिंदे को फांसी दो। कोर्ट के बाहर सैकड़ों लोग जमा हो गए। जब आरोपी को अंदर ले जाया गया, तो गुस्से में लोग गेट पर चढ़ गए। चप्पलें और जूते फेंके गए। कुछ ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग की, लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई। मजिस्ट्रेट ने सुरक्षा को देखते हुए सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की। आरोपी की पुलिस हिरासत 27 नवंबर तक बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हमें आरोपी को सौंप दो, हम खुद सजा देंगे। एक महिला ने रोते हुए कहा, हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, ऐसे दरिंदों को जीने का हक नहीं।

शुक्रवार को मामला और तूल पकड़ लिया। मालेगांव शहर में पूर्ण बंद का ऐलान हुआ। व्यापारिक संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों और राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया। सुबह से हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। 20-25 गांवों से लोग कोर्ट पहुंचे। विरोध मार्च निकाला गया, जिसमें महिलाएं आगे-आगे थीं। मंत्री दादा भुसे ने मार्च में शामिल होकर लोगों को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। दो महीने में सजा सुनिश्चित करेंगे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उनके साथ मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे भी थे। जिरवाल ने कहा कि सरकार सीनियर वकील उज्ज्वल निकम को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बनाने की सिफारिश करेगी। यह संवेदनशील मामला है, आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर भी शुक्रवार को परिवार से मिलने वाली हैं।

यह घटना पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने कहा कि अपराधी कानून से बेअखौर हो गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फास्ट ट्रैक ट्रायल की मांग की। भाजपा महिला प्रदेश अध्यक्ष चित्रा वाघ ने गुस्सा जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दिल दहला देती हैं। समाज को एकजुट होकर बच्चों की रक्षा करनी होगी। मालेगांव बार एसोसिएशन ने फैसला लिया कि कोई वकील आरोपी का केस नहीं लड़ेगा। ग्रामीणों ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। इलाके में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। पुलिस ने भारी सुरक्षा तैनात की है। कोर्ट परिसर में अतिरिक्त फोर्स लगाई गई। कोई हिंसा न हो, इसके लिए निगरानी बढ़ा दी।

परिवार का दर्द देखकर कोई भी इंसान भावुक हो जाए। बच्ची के पिता ने कहा कि हमारी बेटी खेलते-खेलते चली गई। आरोपी से एक महीने पहले झगड़ा हुआ था, शायद इसी का बदला लिया। मां टूट चुकी है। वह कहती हैं, मेरी गोद सूनी हो गई। हमें न्याय चाहिए, ताकि अन्य बच्चे सुरक्षित रहें। गांव में शोक का माहौल है। लोग भजन गा रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं। विरोध के बीच भी शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। पुलिस ने जांच में तेजी ला दी है। अगर कोई अन्य शामिल निकला, तो उसे भी पकड़ा जाएगा। यह मामला POCSO एक्ट के तहत चलेगा, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।

इस घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? कानून है, लेकिन अमल में कमी क्यों? विशेषज्ञ कहते हैं कि जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। स्कूलों में बच्चों को खतरे के संकेत सिखाए जाएं। गांवों में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए। सरकार ने वादा किया है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द न्याय होगा। मालेगांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आरोपी को फांसी मिलेगी। यह सजा अन्य अपराधियों के लिए उदाहरण बनेगी। फिलहाल, शहर में तनाव है, लेकिन आक्रोश न्याय की मांग में बदल गया है। बच्ची की आत्मा को शांति मिले, यही प्रार्थना है। यह दर्दनाक कहानी हमें चेतावनी देती है कि सतर्क रहना जरूरी है।

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कहा कि कानून व्यवस्था ढीली है। सत्ताधारी दलों ने एकजुटता दिखाई। मंत्री गिरीश महाजन ने भी परिवार से मिलकर सहानुभूति जताई। मराठा आंदोलन के नेता जरांगे ने कहा कि यह सबकी बेटी थी। हमें लड़ना होगा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां लोग फांसी की मांग कर रहे हैं। एक पोस्ट में लिखा, न्याय दो, वरना सड़कें जलाएंगे। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध की अपील भी हो रही है। पुलिस ने 100 से ज्यादा जवान तैनात किए हैं। कोई अप्रिय घटना न हो, यही प्राथमिकता है।

यह घटना याद दिलाती है कि समाज में क्रूरता की कोई सीमा नहीं रह गई। तीन साल की बच्ची, जो दुनिया को देख ही रही थी, उसके साथ ऐसा सलूक। परिजन कहते हैं कि वह बहुत शरारती थी, हमेशा हंसती रहती। अब घर में सन्नाटा है। पड़ोसी मदद कर रहे हैं। एक महिला ग्रामीण ने कहा, हम सब बहनें हैं, एक की पीड़ा सबकी है। विरोध मार्च में बच्चे भी शामिल हुए, हाथों में तख्तियां लिए। नारे लगाते, भाईयो जागो, बेटियों को बचाओ। यह दृश्य दिल छू गया। सरकार ने घोषणा की कि पीड़ित परिवार को सहायता दी जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा न्याय सजा है। कोर्ट अब फैसला लेगी। उम्मीद है कि दोषी को सजा-ए-मौत मिलेगी।

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