Trending: कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप- पीड़िता को पहले इनहेलर दिया और फिर दुष्कर्म किया, कोर्ट ने आरोपियों को 8 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा। 

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून 2025 को एक 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की लॉ स्टूडेंट के साथ हुए कथित गैंगरेप ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले...

Jul 2, 2025 - 11:55
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Trending: कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप- पीड़िता को पहले इनहेलर दिया और फिर दुष्कर्म किया, कोर्ट ने आरोपियों को 8 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा। 

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून 2025 को एक 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की लॉ स्टूडेंट के साथ हुए कथित गैंगरेप ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले ने न केवल शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा की कमी को उजागर किया, बल्कि पुलिस और कोर्ट की त्वरित कार्रवाई ने समाज में न्याय की उम्मीद को भी बल दिया। इस घटना में तीन मुख्य आरोपी—मनोजीत मिश्रा, जैब अहमद, और प्रमित मुखर्जी—तथा एक सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी को गिरफ्तार किया गया है। कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने तीन मुख्य आरोपियों को 8 जुलाई तक और सुरक्षा गार्ड को 4 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। 25 जून 2025 को रात 7:30 से 10:50 बजे के बीच साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज के परिसर में यह भयावह घटना घटी। पीड़िता, जो कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा थी, परीक्षा संबंधी फॉर्म भरने के लिए कॉलेज गई थी। इस दौरान मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा, जो कॉलेज का पूर्व छात्र और अस्थायी कर्मचारी था, ने उसे कथित तौर पर बहला-फुसलाकर गार्ड रूम में ले गया। वहां दो अन्य छात्रों, जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी, ने मिलकर पीड़िता के साथ गैंगरेप किया। चौथा आरोपी, सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी, इस अपराध में सहायक की भूमिका में था, जिसने मुख्य द्वार बंद रखकर पीड़िता को भागने से रोका।

घटना के दौरान पीड़िता को पैनिक अटैक हुआ और वह सांस लेने में असमर्थ हो गई। उसकी स्थिति देखकर मनोजीत मिश्रा ने अपने सह-आरोपी जैब अहमद को पास की दवा की दुकान से इनहेलर लाने का निर्देश दिया। पुलिस के अनुसार, यह इनहेलर पीड़िता की मदद के लिए नहीं, बल्कि उसे होश में लाकर अपराध को और लंबा करने के लिए लाया गया। सीसीटीवी फुटेज और दवा की दुकान से प्राप्त 350 रुपये की यूपीआई रसीद ने इस तथ्य की पुष्टि की है। इनहेलर का उपयोग करने के बाद पीड़िता ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुख्य द्वार बंद होने के कारण वह असफल रही। इसके बाद आरोपियों ने उसे जबरन गार्ड रूम में खींच लिया और अपराध को अंजाम दिया।

  • पुलिस जांच और सबूत

कोलकाता पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के 12 घंटे के भीतर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 28 जून को सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिसकी अगुवाई एक सहायक आयुक्त कर रहे हैं। जांच में कई महत्वपूर्ण सबूत सामने आए हैं:

सीसीटीवी फुटेज: कॉलेज परिसर और दवा की दुकान के सीसीटीवी फुटेज ने पीड़िता के बयान की पुष्टि की है। फुटेज में जैब अहमद को इनहेलर खरीदते और पीड़िता को जबरन गार्ड रूम में खींचते हुए देखा गया।

मेडिकल साक्ष्य: पीड़िता का दो बार मेडिकल परीक्षण किया गया, जिसमें उसके बयान से मेल खाते शारीरिक चोटों के निशान पाए गए। मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा के शरीर पर नाखूनों के ताजा खरोंच के निशान भी मिले, जो पीड़िता के प्रतिरोध को दर्शाते हैं।

डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य: पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और घटना का एक वीडियो बरामद किया, जिसे मनोजीत मिश्रा ने कथित तौर पर पीड़िता को ब्लैकमेल करने के लिए बनाया था। इसके अलावा, घटना के दिन पहने गए कपड़ों को भी सबूत के तौर पर जब्त किया गया।

पीड़िता का बयान: पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत दर्ज किया गया, जो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।

कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं और जांच में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया कि पीड़िता की पहचान गोपनीय रहे, और इसके उल्लंघन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। 1 जुलाई 2025 को अलीपुर कोर्ट में सुनवाई के दौरान, मुख्य लोक अभियोजक सौरिन घोषाल ने आरोपियों की 10 दिन की पुलिस हिरासत की मांग की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने पीड़िता को इनहेलर देकर न केवल अपराध को और गंभीर बनाया, बल्कि उनकी मंशा भी स्पष्ट रूप से क्रूर थी। कोर्ट ने तीन मुख्य आरोपियों—मनोजीत मिश्रा, जैब अहमद, और प्रमित मुखर्जी—को 8 जुलाई तक और सुरक्षा गार्ड पिनाकी बनर्जी को 4 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले का मीडिया ट्रायल न हो और पीड़िता की गोपनीयता का सम्मान किया जाए।

इस घटना ने कोलकाता में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। वकीलों और छात्रों के एक समूह ने अलीपुर बार काउंसिल को पत्र लिखकर मांग की कि कोई भी वकील आरोपियों का बचाव न करे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मामले को राजनीतिक रंग देते हुए ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा और मिश्रा के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कथित संबंधों को उजागर किया। हालांकि, टीएमसी ने इन आरोपों से इनकार किया है। बीजेपी नेता सुकांत मजुमदार के नेतृत्व में एक विरोध मार्च भी निकाला गया, जिसे पुलिस ने रोक दिया। कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप मामला न केवल एक जघन्य अपराध की कहानी है, बल्कि यह शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा का आपराधिक इतिहास इस मामले को और जटिल बनाता है। 31 वर्षीय मिश्रा, जो कॉलेज में अस्थायी कर्मचारी और अलीपुर कोर्ट में प्रैक्टिसिंग वकील था, पहले भी कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है। 2013 में उसने एक युवक पर चाकू से हमला किया था, जिसके बाद उसे कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। 2017 में उसने दोबारा दाखिला लिया और 2022 में कानून की डिग्री पूरी की। इसके अलावा, उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न, चोरी, हिंसा, और पुलिस अधिकारी पर हमले जैसे कई मामले दर्ज हैं। हैरानी की बात यह है कि मिश्रा ने 2023 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप-मर्डर मामले में बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अब वह स्वयं इस जघन्य अपराध का आरोपी है।

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