कर्नाटक हाई कोर्ट ने लाडले मशक दरगाह में शिवलिंग पूजा की अनुमति दी, महाशिवरात्रि पर हिंदू पक्ष को बड़ी राहत।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने कलबुरगी जिले के अलंद शहर में स्थित लाडले मशक दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करने की
- कलबुरगी के अलंद दरगाह में राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि पूजा को हाई कोर्ट ने दी मंजूरी
- लाडले मशक दरगाह विवाद में हाई कोर्ट का फैसला, शिवरात्रि पर पूजा की मंजूरी से हिंदू पक्ष राहत
- महाशिवरात्रि पर दरगाह परिसर में शिव पूजा की अनुमति, हाई कोर्ट ने 15 लोगों को प्रवेश दिया
कर्नाटक हाई कोर्ट ने कलबुरगी जिले के अलंद शहर में स्थित लाडले मशक दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति प्रदान की है। यह अनुमति महाशिवरात्रि के अवसर पर दी गई है। कोर्ट ने 15 हिंदू श्रद्धालुओं को दरगाह में प्रवेश कर पूजा करने की इजाजत दी है। यह फैसला फरवरी 2025 में सुनाया गया था और 2026 में भी इसी तरह की याचिका पर विचार हुआ।
कोर्ट ने सिद्धरमैया हीरेमठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि 15 लोग दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा कर सकेंगे। पूजा भारी पुलिस सुरक्षा के साथ संपन्न होगी। यह दरगाह 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी लाडले मशक से जुड़ी है और यहां 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ा शिवलिंग मौजूद है।
यह स्थान ऐतिहासिक रूप से साझा पूजा स्थल रहा है। हाई कोर्ट ने पिछले वर्षों में भी इसी तरह की अनुमति दी थी। 2025 में कोर्ट ने 15 लोगों को पूजा की इजाजत दी थी जो पुलिस सुरक्षा में हुई। 2026 में भी सिद्धरमैया हीरेमठ ने याचिका दायर की जिसमें पुलिस सुरक्षा के साथ पूजा की मांग की गई। दर्गाह प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूजा रोकने की मांग की लेकिन कोर्ट ने सुनवाई पर विचार किया।
कर्नाटक हाई कोर्ट के कलाबुरगी बेंच ने लाडले मशक दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा के लिए अनुमति दी। यह फैसला महाशिवरात्रि से पहले आया। याचिका में हिंदू संगठनों ने पूजा की मांग की थी। कोर्ट ने सीमित संख्या में 15 श्रद्धालुओं को प्रवेश की अनुमति दी। समय दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया गया। दरगाह 14वीं शताब्दी के सूफी संत से जुड़ी है। शिवलिंग 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित है। स्थान साझा पूजा का रहा है। हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष भी अनुमति दी थी। पूजा पुलिस सुरक्षा में हुई।
2026 में याचिका दायर हुई जिसमें 15 फरवरी को पूजा की मांग की गई। दर्गाह प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूजा रोकने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर विचार किया। कोर्ट ने पूजा के लिए सख्त दिशानिर्देश दिए। संख्या सीमित रखी गई। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। यह फैसला हिंदू पक्ष को राहत प्रदान करता है। पूजा सीमित और नियंत्रित तरीके से होगी।
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