2027 में भारत में होगी पहली डिजिटल जनगणना, जाति गणना सहित ऐतिहासिक कदम, कैबिनेट से 11,718 करोड़ की मंजूरी। 

भारत में लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 को मंजूरी मिल गई है, जो देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विशाल

Dec 13, 2025 - 14:27
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2027 में भारत में होगी पहली डिजिटल जनगणना, जाति गणना सहित ऐतिहासिक कदम, कैबिनेट से 11,718 करोड़ की मंजूरी। 
2027 में भारत में होगी पहली डिजिटल जनगणना, जाति गणना सहित ऐतिहासिक कदम, कैबिनेट से 11,718 करोड़ की मंजूरी। 

भारत में लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 को मंजूरी मिल गई है, जो देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विशाल प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की है। यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों की सूचीकरण और आवास गणना का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का रहेगा। लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात होगी, जबकि विशेष क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026। यह अभ्यास जनगणना अधिनियम 1948 और नियमों के तहत होगा, जो ग्राम, शहर और वार्ड स्तर पर प्राथमिक डेटा प्रदान करता है।

जनगणना 2027 में पहली बार पूर्ण डिजिटल माध्यम अपनाया जाएगा, जिसमें डेटा संग्रह मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए होगा, जो एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प दिया जाएगा, जहां वे सुरक्षित वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत विशेषताएं शामिल की गई हैं, जो डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के अनुरूप होंगी। जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली पोर्टल से रीयल-टाइम ट्रैकिंग होगी, जबकि हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब-मैपिंग टूल से गणना क्षेत्रों की डिजिटल परिभाषा होगी। यह प्रक्रिया डेटा की गुणवत्ता बढ़ाएगी और परिणामों को तेजी से उपलब्ध कराएगी। इस जनगणना की एक प्रमुख विशेषता जाति गणना का शामिल होना है, जिसे राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को मंजूरी दी थी। जाति संबंधी डेटा जनसंख्या गणना चरण में इलेक्ट्रॉनिक रूप से कैप्चर किया जाएगा, जो देश की सामाजिक-जनसांख्यिकीय विविधता को दर्शाएगा। यह डेटा आवास स्थिति, सुविधाएं, साक्षरता, आर्थिक गतिविधि, धर्म, भाषा, शिक्षा, प्रवास और प्रजनन जैसे पैरामीटरों के साथ एकत्र होगा। जनगणना में लगभग 30 लाख क्षेत्रीय कर्मचारी लगाए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से सरकारी शिक्षक शामिल होंगे, जो अपनी नियमित ड्यूटी के साथ यह कार्य करेंगे। इन कर्मचारियों को मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा, लगभग 18,600 तकनीकी कर्मचारी लगभग 550 दिनों तक काम करेंगे, जिससे करीब 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा।

जनगणना दो अलग-अलग प्रश्नावली के माध्यम से होगी, एक घरों की सूचीकरण और आवास के लिए, दूसरी जनसंख्या गणना के लिए। हर घर का दौरा किया जाएगा, और डेटा मशीन-पठनीय प्रारूप में होगा। सेंसस-एज-अ-सर्विस प्लेटफॉर्म से मंत्रालयों को स्वच्छ और उपयोग योग्य डेटा उपलब्ध होगा, जबकि उन्नत विजुअलाइजेशन टूल्स से जनता तक गांव और वार्ड स्तर पर परिणाम पहुंचेंगे। यह अभ्यास दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक कार्य होगा, जो 16वीं राष्ट्रीय जनगणना और स्वतंत्रता के बाद आठवीं होगी। डिजिटल होने से डेटा हैंडलिंग और निगरानी कौशल बढ़ेंगे, जो कर्मचारियों के भविष्य के रोजगार में सहायक होंगे। जनगणना की तैयारी में व्यापक प्रचार अभियान चलेगा, जो सटीक और समयबद्ध जानकारी साझा करने पर जोर देगा। क्षेत्रीय कर्मचारी राज्य और जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त होंगे, जबकि पर्यवेक्षक पदों पर भी नियुक्तियां होंगी। डिजिटल प्रक्रिया से त्रुटियां कम होंगी, और डेटा की उपलब्धता तेज होगी। जाति डेटा के शामिल होने से सामाजिक नीतियों और कल्याण योजनाओं के लिए नया आधार तैयार होगा। विशेष क्षेत्रों में अलग व्यवस्था से पूर्ण कवरेज सुनिश्चित होगा। यह जनगणना देश की जनसांख्यिकीय तस्वीर को अद्यतन करेगी, जो विभिन्न मापदंडों पर सूक्ष्म स्तर का डेटा प्रदान करेगी।

जनगणना 2027 में स्व-गणना विकल्प से नागरिक सीधे भाग ले सकेंगे, जो सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर होगा। मोबाइल ऐप बहुभाषी होंगे, जिसमें हिंदी, अंग्लिश और क्षेत्रीय भाषाएं शामिल होंगी। डेटा अपलोड में ब्लॉकचेन जैसी सुरक्षा होगी, हालांकि मुख्य फोकस मजबूत सुरक्षा विशेषताओं पर है। अभ्यास से डिजिटल कौशल का विकास होगा, और परिणाम तेजी से जारी होंगे। जाति गणना चbel जनसंख्या चरण में होगी, जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज होगी। यह कदम सामाजिक विविधता को समझने में महत्वपूर्ण होगा। जनगणना का बजट 11,718.24 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पूरे अभ्यास को कवर करेगा। दो चरणों की संरचना से कार्य व्यवस्थित होगा, और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग समयसीमा से कोई क्षेत्र छूटेगा नहीं। लगभग 30 लाख गणनाकर्मी और पर्यवेक्षक घर-घर जाएंगे, जबकि तकनीकी कर्मचारी सहायता करेंगे। रोजगार सृजन के साथ कौशल विकास भी होगा। डिजिटल डेटा से नीति निर्माण में सुधार आएगा। यह जनगणना देश की जनसंख्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक सर्वेक्षण होगी। स्व-गणना और मोबाइल ऐप से भागीदारी बढ़ेगी। जाति डेटा के शामिल होने से नई अंतर्दृष्टि मिलेगी। अभ्यास की निगरानी केंद्रीकृत पोर्टल से होगी। परिणाम गांव स्तर तक पहुंचेंगे। यह डिजिटल परिवर्तन जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाएगा।

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