ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा पर ED का शिकंजा: वेतन-पेंशन लेने का आरोप, आजमगढ़ में पैतृक घर पर छापेमारी।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और संतकबीरनगर जिलों में ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी
- ED रेड में बड़ा खुलासा: ब्रिटेन की नागरिकता के बाद भी UP मदरसे से सैलरी, शमशुल हुदा के ठिकानों से दस्तावेज बरामद
- मौलाना शमशुल हुदा खान के घर ED छापा: ब्रिटिश पासपोर्ट छिपाकर सालों तक ली सरकारी सैलरी, विदेशी फंडिंग की जांच
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और संतकबीरनगर जिलों में ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुल हुदा खान के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी ने कई गंभीर खुलासे किए हैं। शमशुल हुदा खान पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त करने के बाद भी 2017 तक सरकारी मदरसे से वेतन लिया और पेंशन प्राप्त की, जबकि वे विदेश में रह रहे थे और कोई शिक्षण कार्य नहीं कर रहे थे। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की है और छापेमारी में दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य सामग्री बरामद हुई है।
शमशुल हुदा खान संतकबीरनगर जिले के निवासी हैं। 12 जुलाई 1984 को उन्हें आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर स्थित मदरसा ‘दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम’ में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया था। यह मदरसा सरकारी सहायता प्राप्त है। वे 2007 तक भारत में रहे और उसके बाद ब्रिटेन चले गए। 2013 में उन्होंने ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त की। ईडी के अनुसार, ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त करने के बाद भी शमशुल हुदा खान ने 2013 से 2017 तक मदरसे से वेतन प्राप्त किया। इस दौरान वे विदेश में रह रहे थे और कोई शिक्षण कार्य नहीं कर रहे थे। वे पेंशन भी प्राप्त करते रहे, जो 2023 तक चली। आरोप है कि उन्होंने विदेशी नागरिकता छिपाई और गलत जानकारी देकर सरकारी लाभ लिया। अनुमानित रूप से 16 लाख रुपये का वेतन लिया गया।
- ईडी की छापेमारी
11 फरवरी 2026 को ईडी ने संतकबीरनगर और आजमगढ़ जिलों में शमशुल हुदा खान से जुड़े दो आवासीय ठिकानों पर छापेमारी की। आजमगढ़ के मुबारकपुर में उनके अस्थाई आवास और पैतृक घर पर सर्च ऑपरेशन चला। मुबारकपुर में घर 20-22 साल से बंद था, जिसका ताला तोड़कर टीम ने प्रवेश किया। छापेमारी कई घंटे चली, जिसमें कई दस्तावेज बरामद हुए।
ईडी सूत्रों के अनुसार, पैतृक घर से कई पहचान पत्र बरामद हुए। मोबाइल स्कैनिंग से पता चला कि उन्हें व्हाट्सऐप ग्रुप में ‘मौलाना दादा’ के नाम से जाना जाता था। घर से कई धार्मिक किताबें भी मिलीं। छापेमारी में 17 अचल संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए, जिनका घोषित मूल्य लगभग 3 करोड़ रुपये है लेकिन बाजार मूल्य 20 करोड़ से अधिक अनुमानित है। कुल संपत्ति 30 करोड़ रुपये के आसपास बताई गई। शमशुल हुदा खान पर आरोप है कि उन्होंने राजा फाउंडेशन और कुलियातुल बनातिर रजाबिया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी जैसे एनजीओ के माध्यम से विदेशी फंडिंग प्राप्त की। ये फंड मदरसों के निर्माण और संपत्ति खरीद में इस्तेमाल हुए। फंड बैंक खातों में आए, जिनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। कुछ मदरसों की मान्यता रद्द की गई थी।
जांच में विदेशी फंडिंग के अलावा नागरिकता छिपाने, गलत जानकारी देने और संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। कुछ रिपोर्ट्स में पाकिस्तान कनेक्शन और अन्य देशों की यात्राओं का जिक्र है। मदरसों के माध्यम से फंडिंग और अन्य गतिविधियों की जांच हो रही है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया है। जांच जारी है और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। छापेमारी के बाद इलाके में सन्नाटा पसरा रहा। अधिकारी कोई टिप्पणी नहीं कर रहे। इससे पहले यूपी एटीएस और पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की थीं, जिनमें धोखाधड़ी, फॉरजी और अन्य धाराएं शामिल हैं। मदरसा 2017 में सील किया गया था और मान्यता रद्द हुई।
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