दिल्ली रेड फोर्ट विस्फोट: 5000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से डॉक्टर उमर नबी की पूरी गतिविधि का खुलासा।

दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भयानक विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस आतंकी घटना में 13 लोगों की मौत हो

Nov 17, 2025 - 13:57
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दिल्ली रेड फोर्ट विस्फोट: 5000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से डॉक्टर उमर नबी की पूरी गतिविधि का खुलासा।
दिल्ली रेड फोर्ट विस्फोट: 5000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से डॉक्टर उमर नबी की पूरी गतिविधि का खुलासा।

दिल्ली के ऐतिहासिक रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए भयानक विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस आतंकी घटना में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए। विस्फोट एक सफेद रंग की हुंडई i20 कार में विस्फोटक रखकर किया गया, जो चांदनी चौक इलाके में एक सिग्नल पर खड़ी थी। कार चला रहे मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन्नबी थे, जो जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के निवासी थे। वे हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में जनरल मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। पुलिस ने 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मदद से 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक उनकी हर गतिविधि का पूरा रूट मैप तैयार कर लिया है। यह मैप फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय से शुरू होकर रेड फोर्ट तक फैला हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' को पूरी तरह से उजागर करने में जुटी हैं।

विस्फोट शाम करीब 6 बजकर 52 मिनट पर हुआ। रेड फोर्ट क्रॉसिंग पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे ने इसकी पूरी घटना कैद कर ली। फुटेज में व्यस्त ट्रैफिक के बीच अचानक एक तेज लपट दिखाई देती है, जो एक लाल गुब्बारे के फटने जैसी लगती है। उसके बाद धुआं और चीख-पुकार मच जाती है। लोग भागने लगते हैं और आसपास के दुकानों के शीशे टूट जाते हैं। फोरेंसिक जांच से पता चला कि कार में 30 से 40 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले विस्फोटक भरे हुए थे। इनमें अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल (ANFO) का इस्तेमाल किया गया था। विस्फोट इतना जोरदार था कि 50 फुट नीचे लाल किले मेट्रो स्टेशन में भी कंपन महसूस हुआ। स्टेशन के अंदर खाने की स्टॉल पर रखी चीजें हिल गईं। सौभाग्य से मेट्रो ट्रेन या स्टेशन की संरचना को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन अगर विस्फोट थोड़ा और शक्तिशाली होता तो हालात और बिगड़ सकते थे।

डॉक्टर उमर उन्नबी का असली नाम उमर मोहम्मद था। वे पुलवामा के सांबूरा गांव के रहने वाले थे। उन्होंने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमडी मेडिसिन की डिग्री ली थी। उसके बाद वे अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट रहे। मार्च 2024 में वे दिल्ली आए और अल-फलाह विश्वविद्यालय में नौकरी जॉइन की। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि वे सामान्य दिखते थे और मरीजों का इलाज भी अच्छे से करते थे। लेकिन जांच में पता चला कि वे जयश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन से जुड़े हुए थे। उनकी मां शमीमा बानो का डीएनए टेस्ट विस्फोट स्थल से मिले अवशेषों से मैच कर गया। इससे पुष्टि हुई कि वे ही कार चला रहे थे और यह एक सुसाइड ब्लास्ट था। पुलिस को उनके अप्रैल का एक फोटो भी मिला, जिसमें वे डॉक्टर की सफेद कोट और स्टेथोस्कोप पहने मुस्कुरा रहे हैं।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से उनकी पूरी यात्रा का पता लगाया। 29 अक्टूबर को पहली बार हुंडई i20 कार को फरीदाबाद के सेक्टर 37 में देखा गया। उसी दिन कार अल-फलाह विश्वविद्यालय के कैंपस में घुसी। विश्वविद्यालय के गेट पर लगे कैमरे ने कार को पार्किंग में खड़ी होते रिकॉर्ड किया। उमर वहां अपने सहयोगी डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई से मिलने आए थे। मुजम्मिल भी उसी विभाग में डॉक्टर थे और जम्मू कश्मीर के रहने वाले थे। दोनों के बीच सालों पुराना रिश्ता था। वे कैंपस में ही आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे थे। 30 अक्टूबर तक कार कैंपस में ही रही। उसके बाद उमर कार लेकर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर बढ़े। वे नूह जिले के फीरोजपुर झिर्का टोल प्लाजा से गुजरे, जहां कैमरे ने उन्हें कैश से टोल चुकाते कैद किया। बैकसीट पर एक काला बैग दिखाई दिया, जिसमें विस्फोटक होने का शक है।

अगले दिनों में उमर की गतिविधियां और रहस्यमयी हो गईं। वे इंडिया गेट, कनॉट प्लेस, लोधी रोड और मयूर विहार जैसे दिल्ली के प्रमुख स्थानों पर घूमते दिखे। 9 नवंबर को फरीदाबाद में पुलिस की छापेमारी शुरू हुई। मुजम्मिल के किराए के कमरे से 2900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर, टाइमर और राइफलें बरामद हुईं। उसी रात उमर घबरा गए और विश्वविद्यालय से फरार हो गए। वे अपनी कार में ही दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक ढाबे पर रुके। वहां चाय पीते हुए कैमरे में दिखे। वे किसी से बात नहीं कर रहे थे। सुबह होते ही वे नूह की ओर बढ़े, जहां एटीएम से कैश निकाला। दोपहर में वे बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में दाखिल हुए। रास्ते में एक मोबाइल शॉप पर रुककर उन्होंने दो फोन हैंडल करते दिखे। एक फुटेज में वे फरीदाबाद के एक मोबाइल दुकान पर फोन सौंपते नजर आए। जांचकर्ताओं का मानना है कि वे एन्क्रिप्टेड ऐप्स जैसे थ्रीमा का इस्तेमाल कर रहे थे।

10 नवंबर को उमर की अंतिम गतिविधियां सबसे महत्वपूर्ण हैं। सुबह वे दिल्ली में घुसे। एक सीसीटीवी में उन्हें आसफ अली रोड पर पैदल जाते देखा गया। उसके बाद वे फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास दिखे। दोपहर में वे वजीरपुर के एक चाय स्टॉल पर रुके। वहां वे दो फोन इस्तेमाल करते दिखे। शाम को वे रेड फोर्ट पार्किंग में पहुंचे। वहां कार खड़ी की और पैदल ही चांदनी चौक की ओर बढ़े। 6 बजकर 52 मिनट पर विस्फोट हो गया। विस्फोट स्थल से तीन 9 एमएम कारतूस मिले, जो आमतौर पर सिविलियनों के लिए प्रतिबंधित हैं। हथियार नहीं मिला, लेकिन इससे आतंकी मॉड्यूल की साजिश का पता चलता है। पुलिस ने 43 सीसीटीवी ग्रैब्स एक्सेस किए, जो उनकी पूरी यात्रा को दर्शाते हैं। कुल 5000 से ज्यादा कैमरों की स्कैनिंग से 'इलेक्ट्रॉनिक रूट' तैयार हुआ।

इस मामले में अल-फलाह विश्वविद्यालय पूरी तरह से जांच के घेरे में है। यहां तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। मुजम्मिल गनई के अलावा डॉक्टर शाहीन शाहिद, जो जेईएम की महिला विंग की भर्तीकर्ता बताई जा रही हैं, और एक अन्य डॉक्टर। विश्वविद्यालय ने अपने वेबसाइट पर फर्जी मान्यता दिखाई थी, जिसके लिए नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल ने शो कॉज नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड का फोरेंसिक ऑडिट ऑर्डर किया है। पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं- एक धोखाधड़ी के लिए और दूसरी जालसाजी के लिए। कैंपस से डायरी और नोटबुक बरामद हुईं, जिनमें 25-30 नामों की लिस्ट थी। ज्यादातर नाम जम्मू कश्मीर और फरीदाबाद के थे। इनमें कोडेड मैसेज, तारीखें और 'ऑपरेशन' शब्द दोहराया गया था। जांच से पता चला कि वे दो साल से कई हमलों की योजना बना रहे थे, जो 2008 मुंबई हमलों जैसा होना था। लेकिन फरीदाबाद छापेमारी से घबराकर उन्होंने जल्दबाजी में यह हमला किया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने केस अपने हाथ में ले लिया है। उन्होंने दिल्ली, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छापे मारे। कश्मीर से एक व्यक्ति अली को गिरफ्तार किया, जो कार खरीदने में मददगार था। कार उसके नाम पर रजिस्टर्ड थी। फरीदाबाद क्राइम ब्रांच ने विश्वविद्यालय में एक युवक को हिरासत में लिया। पुलवामा में उमर के घर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। उनकी पत्नी और परिवार ने कहा कि वे मार्च 2024 में दिल्ली गए थे, लेकिन अब दुखी हैं। एनआईए ने 10 सदस्यीय टीम बनाई है। वे स्विट्जरलैंड आधारित एन्क्रिप्टेड ऐप्स की जांच कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा कि अगर राज्यों के बीच सूचना साझा होती तो हमला रोका जा सकता था। टोल प्लाजा पर फेस रिकग्निशन कैमरे न होने से ट्रैकिंग में देरी हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एलएनजेपी अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने एनआईए को तेजी से जांच के निर्देश दिए। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शोक व्यक्त किया। एनआईए ने कहा कि यह आतंकी घटना थी। विश्वविद्यालय ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और सहयोग का वादा किया। लेकिन जांच में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। दो अन्य व्यक्ति रिजवान और शोएब को पकड़ा गया। एक लाल फोर्ड इकोस्पोर्ट कार भी बरामद हुई, जो उमर की थी।

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