दिल्ली की हवा में दशकों बाद सुधार, जुलाई 2025 में औसत AQI 78, सात सालों में सबसे साफ हवा।
Delhi: दिल्ली, जो लंबे समय से दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार रही है, ने जुलाई 2025 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस बार दिल्ली....
दिल्ली, जो लंबे समय से दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार रही है, ने जुलाई 2025 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस बार दिल्ली ने पिछले सात सालों में जुलाई महीने की सबसे साफ हवा दर्ज की है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का औसत 78 रहा, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है। यह आंकड़ा 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन वाले साल से भी बेहतर है, जब औद्योगिक और वाहन गतिविधियों पर पाबंदियों के कारण प्रदूषण में काफी कमी आई थी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इस सुधार को मौसम की अनुकूल परिस्थितियों के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई ठोस कार्य योजनाओं का नतीजा बताया है। यह खबर दिल्लीवासियों के लिए राहत की सांस लेकर आई है, जो हर साल सर्दियों में जहरीली हवा का सामना करते हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा को मापने का एक मानक है। यह 0 से 500 के बीच होता है, जहां 0-50 ‘अच्छा’, 51-100 ‘संतोषजनक’, 101-200 ‘मध्यम’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’, और 401-500 ‘गंभीर’ माना जाता है। जुलाई 2025 में दिल्ली का औसत AQI 78 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में है और स्वास्थ्य के लिए कम जोखिम वाला माना जाता है। CAQM के अनुसार, यह दिल्ली के लिए जुलाई महीने में 2018 के बाद सबसे बेहतर प्रदर्शन है। पिछले सालों के आंकड़ों से तुलना करें तो जुलाई का औसत AQI 2018 में 104, 2019 में 134, 2020 में 84, 2021 में 110, 2022 में 87, 2023 में 84, और 2024 में 96 था। इस साल का AQI इन सभी से बेहतर है।
जुलाई 2025 में दिल्ली में 31 में से 29 दिन ‘संतोषजनक’ या ‘अच्छी’ हवा वाले रहे, जो एक रिकॉर्ड है। तुलना के लिए, 2018 में 16, 2019 में 12, 2020 में 25, 2021 में 20, 2022 में 25, 2023 में 26, और 2024 में 17 दिन संतोषजनक हवा वाले थे। इस साल जनवरी से जुलाई तक दिल्ली में 126 दिन साफ हवा वाले दर्ज किए गए, जो पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में पर्यावरण को प्राथमिकता देने और लोगों की भागीदारी का नतीजा है।
इस सुधार के पीछे कई कारण हैं। पहला, अनुकूल मौसमी परिस्थितियां। जुलाई 2025 में दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिसने हवा में मौजूद धूल और प्रदूषकों को कम किया। हवा की गति 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा रही, और वेंटिलेशन इंडेक्स 6000 से 8100 m²/s के बीच रहा, जो प्रदूषकों को फैलने में मदद करता है। मौसम विभाग के अनुसार, अधिकतम तापमान 34-36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से थोड़ा कम था।
दूसरा, प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयास। CAQM ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए। इनमें वन महोत्सव के तहत 70 लाख पेड़ लगाने की योजना, निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग, मिस्टिंग सिस्टम, और लैंडफिल बायो-माइनिंग शामिल हैं। कृत्रिम बारिश की तैयारियां भी शुरू की गई हैं। ‘ग्रीन दिल्ली’ ऐप के जरिए धूल और कचरा जलाने की शिकायतों का समाधान किया गया। पंजाब में पराली जलाने को कम करने के लिए वैकल्पिक फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना शुरू की गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी पंजाब के 2009 के जल कानून की समीक्षा का सुझाव दिया, जो देर से धान की बुआई और पराली जलाने का कारण बनता है।
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। GRAP के तहत AQI 201-300 (खराब) होने पर कचरा जलाने पर रोक, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़कों की नियमित सफाई, और वाहनों के उत्सर्जन की जांच जैसे कदम उठाए जाते हैं। जुलाई में AQI ज्यादातर 100 से नीचे रहा, इसलिए सख्त GRAP उपायों की जरूरत नहीं पड़ी।
PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों की मात्रा में भी कमी आई। जनवरी-जुलाई 2025 में PM2.5 का औसत 79 µg/m³ रहा, जो 2024 में 94, 2023 में 83, और 2018 में 103 था। इसी तरह, PM10 का औसत 180 µg/m³ रहा, जो 2024 में 209 और 2018 में 234 था। ये आंकड़े 2020 को छोड़कर सबसे कम हैं, जब लॉकडाउन के कारण प्रदूषण बहुत कम था।
दिल्ली की हवा सर्दियों में अक्सर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाती है, जब पराली जलाने, वाहनों का धुआं, और ठंडी हवा के कारण प्रदूषण बढ़ता है। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 में दिल्ली का AQI 491 तक पहुंच गया था, जो ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में था। लेकिन जुलाई जैसे महीनों में हवा साफ रहती है, और इस बार यह असाधारण रूप से बेहतर रही।
CAQM और दिल्ली सरकार ने इस सुधार को बनाए रखने के लिए और कदम उठाने का वादा किया है। सिरसा ने कहा कि नेहरू पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर AQI कम करने के लिए अध्ययन शुरू किया गया है, जहां लोग सुबह सैर और व्यायाम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार तभी टिकाऊ होगा, जब वाहनों के उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, और पराली जलाने पर लगातार नियंत्रण रखा जाए। सामाजिक कार्यकर्ता अनीता शर्मा ने कहा कि लोगों की जागरूकता और सरकार की जवाबदेही इस सफलता की कुंजी है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां बाकी हैं। दिल्ली की हवा साल भर साफ रखने के लिए पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश के साथ बेहतर समन्वय जरूरी है। पराली जलाने की समस्या अभी भी सर्दियों में बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, पुराने वाहनों को हटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की गति को तेज करना होगा। 1 अप्रैल 2025 से दिल्ली में 15 साल पुराने वाहनों को ईंधन देने पर रोक लगाने का फैसला एक सकारात्मक कदम है।
दिल्लीवासियों ने इस खबर का स्वागत किया है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा कि साफ हवा में सांस लेना एक अलग अनुभव है, लेकिन सर्दियों में फिर से धुंध की चिंता है। उन्होंने सरकार से साल भर ऐसी ही कोशिशें जारी रखने की अपील की।
जुलाई 2025 में दिल्ली की हवा दशकों में सबसे साफ रही। औसत AQI 78 और 29 संतोषजनक दिन इस बात का सबूत हैं कि सही नीतियां और लोगों का सहयोग प्रदूषण से लड़ने में कारगर हो सकता है। CAQM, दिल्ली सरकार, और अन्य हितधारकों के समन्वित प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया। अब चुनौती इस सुधार को साल भर बनाए रखने और सर्दियों में प्रदूषण की मार से बचने की है। दिल्लीवासियों को उम्मीद है कि यह शुरुआत एक स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य की ओर ले जाएगी।
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