चंदन मिश्रा हत्याकांड- बिहार पुलिस ने पश्चिम बंगाल से छह आरोपियों को दबोचा, जांच में गैंगवार का खुलासा।

Chandan Mishra Murder: बिहार की राजधानी पटना के पारस एचएमआरआई अस्पताल में गैंगस्टर चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी। इस ...

Jul 19, 2025 - 11:10
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चंदन मिश्रा हत्याकांड- बिहार पुलिस ने पश्चिम बंगाल से छह आरोपियों को दबोचा, जांच में गैंगवार का खुलासा।
चंदन मिश्रा हत्याकांड- बिहार पुलिस ने पश्चिम बंगाल से छह आरोपियों को दबोचा, जांच में गैंगवार का खुलासा।

बिहार की राजधानी पटना के पारस एचएमआरआई अस्पताल में गैंगस्टर चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी। इस सनसनीखेज मामले में बिहार पुलिस और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने 48 घंटे के भीतर बड़ी सफलता हासिल की। 19 जुलाई 2025 को पश्चिम बंगाल में ताबड़तोड़ छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर रही है और जल्द ही इन्हें पटना लाया जाएगा। इसके साथ ही अन्य संदिग्धों के ठिकानों पर भी छापेमारी जारी है। जांच में सामने आया है कि यह हत्या गैंगवार और पुरानी रंजिश का परिणाम थी, जिसमें शेरू सिंह गैंग का नाम उभरकर सामने आया है।

  • हत्याकांड का विवरण

17 जुलाई 2025 को सुबह करीब 7:25 बजे, पटना के राजा बाजार स्थित पारस एचएमआरआई अस्पताल में दो मोटरसाइकिलों पर सवार छह हथियारबंद अपराधी पहुंचे। इनमें से पांच शूटर अस्पताल की दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर 209 में घुसे, जहां चंदन मिश्रा इलाज के लिए भर्ती थे। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि शूटरों ने पिस्तौल में गोलियां भरीं और ताबड़तोड़ फायरिंग कर चंदन मिश्रा को मौत के घाट उतार दिया। वारदात के बाद शूटर बाइक पर सवार होकर फरार हो गए, और एक वीडियो में वे हथियार लहराते हुए जश्न मनाते दिखे। पुलिस ने मौके से 12 गोली के खोखे बरामद किए। इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

चंदन मिश्रा, बक्सर जिले के सोनबरसा गांव के रहने वाले, एक कुख्यात गैंगस्टर थे। उन पर बक्सर और आरा में हत्या, डकैती, और रंगदारी सहित 24 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। 2012 में एक हत्या के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह बेऊर जेल में सजा काट रहे थे, लेकिन मेडिकल आधार पर पैरोल पर बाहर आए थे। 15 जुलाई को उन्हें पारस अस्पताल में भर्ती किया गया, और 16 जुलाई को डिस्चार्ज होना था, लेकिन वह एक दिन और रुक गए, जिसके बाद यह वारदात हुई।

  • पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

बिहार पुलिस और एसटीएफ ने इस हत्याकांड की जांच को प्राथमिकता दी। 19 जुलाई 2025 को पश्चिम बंगाल में संयुक्त छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से कुछ शेरू सिंह गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में तौसीफ उर्फ बादशाह, आकिब मालिक, सोनू, कालू उर्फ मुस्तकीम, भिंडी उर्फ बलवंत सिंह, और एक अन्य संदिग्ध शामिल हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, तौसीफ बादशाह इस शूटआउट का मुख्य सरगना था, जो फुलवारी शरीफ इलाके में जमीन कारोबार और सुपारी किलिंग से जुड़ा है।

पुलिस ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जेल में बंद शेरू सिंह (वास्तविक नाम: ओंकारनाथ सिंह) से भी पूछताछ की, जिसने खुलासा किया कि हत्या की साजिश बिहार की जेल में रची गई थी। शेरू सिंह और चंदन मिश्रा कभी करीबी दोस्त थे, लेकिन बाद में उनकी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। 2009 में दोनों ने मिलकर बक्सर में अनिल सिंह की हत्या की थी, जिसके लिए उन्हें जेल हुई थी।

पुलिस ने बिहार के फुलवारी शरीफ, बक्सर, आरा, वैशाली, और मुजफ्फरपुर में भी छापेमारी की। 18 जुलाई को वैशाली और मुजफ्फरपुर में छापेमारी की गई, लेकिन तब कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। इसके बाद पश्चिम बंगाल में मिले ठोस सुराग के आधार पर कार्रवाई तेज की गई। पुलिस को संदेह है कि कुछ और अपराधी इस साजिश में शामिल हैं, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है।

  • गैंगवार और साजिश का पर्दाफाश

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह हत्याकांड गैंगवार और वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम माना जा रहा है। एडीजी मुख्यालय कुंदन कृष्णन ने बताया कि शेरू सिंह गैंग ने इस हत्या की साजिश रची थी। शेरू सिंह, जो पुरुलिया जेल में बंद है, और चंदन मिश्रा के बीच पुरानी रंजिश थी। 2011 में दोनों ने बक्सर में कई हत्याएं की थीं, लेकिन बाद में आपसी विवाद के कारण दोनों अलग हो गए। शेरू सिंह ने तौसीफ बादशाह और अन्य शूटरों को इस हत्या के लिए सुपारी दी थी।

सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि शूटरों ने अस्पताल में घुसने से पहले पूरी योजना बनाई थी। उन्हें अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और चंदन के कमरे की जानकारी थी। पुलिस को संदेह है कि कुछ स्थानीय लोगों ने शूटरों को मदद दी। समनपुरा इलाके में दो लोगों और बोरिंग रोड से हथियार सप्लाई करने वाले एक व्यक्ति की पहचान भी की गई है।

इस हत्याकांड ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल जैसे सुरक्षित स्थान पर दिनदहाड़े हत्या ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है। विपक्षी दलों, जैसे राजद और कांग्रेस, ने नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधा। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि बिहार में हत्या और अपराध रोजमर्रा की बात हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधी इतने बेखौफ हैं कि वे अस्पताल में भी हमला कर सकते हैं।

पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आईजी जितेंद्र राणा ने बताया कि अस्पताल की सुरक्षा निजी एजेंसी के पास थी, और अगर सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

चंदन मिश्रा हत्याकांड ने बिहार में अपराध की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। पश्चिम बंगाल से छह आरोपियों की गिरफ्तारी और शेरू सिंह गैंग के कनेक्शन से साफ है कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कुछ राहत मिली है, लेकिन बिहार में बढ़ते अपराध और गैंगवार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अपराधी कितने बेखौफ हो चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है, जिसकी निगरानी डीजीपी विनय कुमार कर रहे हैं। 19 जुलाई को डीजीपी ने आईजी जितेंद्र राणा और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के साथ समीक्षा बैठक की और जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस को उम्मीद है कि अन्य फरार आरोपियों को जल्द पकड़ लिया जाएगा।

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