Zomato का मुनाफा पहली तिमाही में 90% घटा, 253 करोड़ से 25 करोड़ पर आया, फिर भी शेयरों में 7% की तेजी। 

भारत की प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी Zomato (जिसकी पैरेंट कंपनी अब इटरनल लिमिटेड के नाम से जानी जाती है) ने वित्त...

Jul 22, 2025 - 12:10
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Zomato का मुनाफा पहली तिमाही में 90% घटा, 253 करोड़ से 25 करोड़ पर आया, फिर भी शेयरों में 7% की तेजी। 
Zomato का मुनाफा पहली तिमाही में 90% घटा, 253 करोड़ से 25 करोड़ पर आया, फिर भी शेयरों में 7% की तेजी। 

भारत की प्रमुख फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी Zomato (जिसकी पैरेंट कंपनी अब इटरनल लिमिटेड के नाम से जानी जाती है) ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के नतीजे 21 जुलाई 2025 को जारी किए। इन नतीजों ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों को चौंका दिया, क्योंकि कंपनी का शुद्ध मुनाफा (नेट प्रॉफिट) पिछले साल की समान तिमाही के 253 करोड़ रुपये से 90% घटकर मात्र 25 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, इस भारी गिरावट के बावजूद, Zomato के शेयरों में 7% से अधिक की तेजी देखी गई, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। कंपनी का राजस्व (रेवेन्यू) 70.4% बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 4,206 करोड़ रुपये था। इस खबर ने केवल Zomato के कारोबारी प्रदर्शन पर चर्चा छेड़ दी है।

  • Zomato के Q1FY26 के नतीजे

Zomato की पैरेंट कंपनी इटरनल लिमिटेड ने 21 जुलाई 2025 को अपनी पहली तिमाही (Q1FY26) के नतीजे जारी किए। इन नतीजों के अनुसार, कंपनी का शुद्ध मुनाफा 90% गिरकर 25 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही (अप्रैल-जून 2024) में यह 253 करोड़ रुपये था। यह गिरावट तिमाही आधार पर भी देखी गई, क्योंकि पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2025) में कंपनी का मुनाफा 39 करोड़ रुपये था, जो अब 35.89% कम हो गया।

हालांकि, मुनाफे में कमी के बावजूद, कंपनी के राजस्व में शानदार बढ़ोतरी देखी गई। Q1FY26 में Zomato का परिचालन से राजस्व (ऑपरेशनल रेवेन्यू) 70.4% बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 4,206 करोड़ रुपये था। कुल आय (टोटल इनकम) भी 69.31% बढ़कर 7,521 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले साल यह 4,442 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के खर्चों में भी 15% की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1,854 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,137 करोड़ रुपये हो गए। कुल खर्च 7,433 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल 4,203 करोड़ रुपये था।

  • मुनाफे में गिरावट के कारण

Zomato के मुनाफे में इतनी बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कंपनी का अपने क्विक कॉमर्स (ब्लिंकिट) और गॉइंग-आउट सेगमेंट में भारी निवेश है। इटरनल के सीईओ अक्षांत गोयल ने बताया कि क्विक कॉमर्स और गॉइंग-आउट बिजनेस में किए गए निवेश के कारण कंपनी का समायोजित EBITDA (एडजस्टेड एबिटडा) 42% घटकर 172 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, फूड डिलीवरी सेगमेंट में एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 3.9% से बढ़कर 5% हो गया, जिसने कुछ हद तक इस गिरावट की भरपाई की।

क्विक कॉमर्स सेगमेंट, विशेष रूप से ब्लिंकिट, ने इस तिमाही में बेहतरीन प्रदर्शन किया। ब्लिंकिट का नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) पहली बार फूड डिलीवरी के NOV को पार कर गया, और B2C बिजनेस का कुल नेट ऑर्डर वैल्यू 55% बढ़कर 20,183 करोड़ रुपये हो गया। ब्लिंकिट की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) में भी तिमाही आधार पर 25% और सालाना आधार पर 120% की वृद्धि दर्ज की गई।

कंपनी ने हाल ही में ब्लिंकिट में 500 करोड़ रुपये का नया निवेश किया, जिसके बाद इसका कुल निवेश 2,800 करोड़ रुपये हो गया है। इसके अलावा, नवंबर 2024 में Zomato ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 8,500 करोड़ रुपये जुटाए, जो मुख्य रूप से क्विक कॉमर्स के विस्तार के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।

  • शेयरों में तेजी का कारण

90% मुनाफे की गिरावट के बावजूद, Zomato के शेयरों में 7.5% की तेजी देखी गई। 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का शेयर 5.38% बढ़कर 271.20 रुपये पर बंद हुआ, और दिन के दौरान यह 276.80 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। यह तेजी निवेशकों के कंपनी के भविष्य पर भरोसे को दर्शाती है। ब्रोकरेज फर्मों जैसे CLSA, मोतीलाल ओसवाल, और बर्नस्टीन ने Zomato के शेयरों के लिए "खरीदें" की सलाह दी है, और कुछ ने टारगेट प्राइस को 300-350 रुपये तक बढ़ा दिया है।

निवेशकों की इस सकारात्मक प्रतिक्रिया का कारण Zomato की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं हैं। ब्लिंकिट के क्विक कॉमर्स सेगमेंट में 46% की मार्केट हिस्सेदारी है, जो इसे स्विगी इंस्टामार्ट (25%) और जेप्टो (29%) से आगे रखती है। इसके अलावा, Zomato ने हाल ही में ब्लिंकिट फूड्स नामक एक नई कंपनी की घोषणा की, जो जेप्टो कैफे के बिजनेस मॉडल को टक्कर देगी।

Zomato के शेयरों ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। 27 जनवरी 2023 को इसका शेयर 46.95 रुपये पर था, जो 1 अगस्त 2024 तक 238 रुपये तक पहुंच गया, यानी डेढ़ साल में 400% की वृद्धि। इस साल (2025) अब तक शेयरों में 90% की तेजी देखी गई है। कंपनी का मार्केट कैप 2,61,717.51 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो इसे भारत की शीर्ष डिजिटल कंपनियों में से एक बनाता है।

पिछले साल (जून 2024 तिमाही) Zomato ने 253 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था, जो उस समय 126.5 गुना की वृद्धि थी। इस प्रदर्शन ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया था, और शेयर 16.51% चढ़कर 266 रुपये के पार पहुंच गए थे। हालांकि, इस साल मुनाफे में गिरावट ने कुछ चिंताएं पैदा की हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह अस्थायी है और कंपनी की रणनीति दीर्घकालिक मुनाफे के लिए है।

सोशल मीडिया पर Zomato के नतीजों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखी गईं। कुछ यूजर्स ने मुनाफे में गिरावट पर चिंता जताई, जबकि अन्य ने कंपनी के राजस्व वृद्धि और क्विक कॉमर्स में नेतृत्व की तारीफ की। एक यूजर (@AnshuIIMC) ने लिखा, "Zomato का मुनाफा भले ही 90% गिरा हो, लेकिन रेवेन्यू में 70% की बढ़ोतरी और ब्लिंकिट की ग्रोथ इसे भविष्य का स्टार बनाती है।" वहीं, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या क्विक कॉमर्स में भारी निवेश का जोखिम भविष्य में कंपनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

Zomato अपनी क्विक कॉमर्स शाखा ब्लिंकिट को भारत में और मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। कंपनी का मानना है कि लोग अब न केवल खाना, बल्कि किराना और अन्य जरूरी सामान भी ऑनलाइन ऑर्डर करना पसंद कर रहे हैं। ब्लिंकिट के डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार हो रहा है, और कंपनी का लक्ष्य इसे और बड़े स्तर पर ले जाना है। इसके अलावा, Zomato का गॉइंग-आउट सेगमेंट, जो रेस्तरां बुकिंग और इवेंट टिकटिंग पर केंद्रित है, भी कंपनी की आय का एक नया स्रोत बन सकता है।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अनुमान लगाया है कि Zomato वित्त वर्ष 2025 में 4.7%, 2026 में 8.6%, और 2027 में 12.9% का PAT मार्जिन हासिल करेगा। यह दर्शाता है कि कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति मुनाफे को बढ़ाने की दिशा में है, भले ही अभी निवेश के कारण मुनाफा कम हुआ हो।

Zomato के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिस्पर्धा है। स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसे प्रतिद्वंद्वी क्विक कॉमर्स में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इसके अलावा, बढ़ते खर्च और निवेश के कारण मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और बढ़ती इंटरनेट पहुंच Zomato के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है। विशाल मध्यम वर्ग और उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव (जैसे ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती लोकप्रियता) कंपनी के लिए अनुकूल हैं।

Zomato का वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में मुनाफा 90% घटकर 25 करोड़ रुपये रह गया, जो निवेशकों के लिए शुरुआती झटका हो सकता है। लेकिन कंपनी का राजस्व 70.4% बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये हो गया, और ब्लिंकिट की शानदार वृद्धि ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। शेयरों में 7% की तेजी और ब्रोकरेज फर्मों की सकारात्मक राय इस बात का सबूत है कि Zomato की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं। क्विक कॉमर्स और गॉइंग-आउट सेगमेंट में निवेश भले ही अभी मुनाफे को प्रभावित कर रहा हो, लेकिन यह कंपनी को भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाए रखेगा। Zomato का यह प्रदर्शन न केवल इसके बिजनेस मॉडल की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि निवेशक कंपनी के भविष्य पर भरोसा कर रहे हैं।

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