Online Gaming में 45 करोड़ भारतीय हर साल गंवाते हैं 20,000 करोड़, रियल मनी Gaming पर प्रतिबंध, ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा। 

भारत में Online रियल मनी Gaming की बढ़ती लत ने समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। सरकारी अनुमान के अनुसार, देश के लगभग 45 करोड़ लोग हर साल Online रियल मनी

Aug 22, 2025 - 12:33
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Online Gaming में 45 करोड़ भारतीय हर साल गंवाते हैं 20,000 करोड़, रियल मनी Gaming पर प्रतिबंध, ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा। 
Online Gaming में 45 करोड़ भारतीय हर साल गंवाते हैं 20,000 करोड़, रियल मनी Gaming पर प्रतिबंध, ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा। 

भारत में Online रियल मनी Gaming की बढ़ती लत ने समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। सरकारी अनुमान के अनुसार, देश के लगभग 45 करोड़ लोग हर साल Online रियल मनी Gaming, जैसे फंतासी स्पोर्ट्स, पोकर, रम्मी और अन्य जुआ आधारित खेलों में करीब 20,000 करोड़ रुपये गंवा देते हैं। इस लत के कारण न केवल व्यक्तिगत आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए सरकार ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में ‘Online Gaming (प्रोत्साहन एवं विनियमन) विधेयक 2025’ पेश किया और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया।

यह विधेयक रियल मनी Gaming पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, जबकि ई-स्पोर्ट्स और सोशल Gaming को बढ़ावा देता है। 21 अगस्त को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी, और अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा। इस विधेयक को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि Online मनी Gaming समाज के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है। यह न केवल लोगों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि लत, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है। वैष्णव ने बताया कि कई परिवार इस लत के कारण बर्बाद हो रहे हैं, और कुछ मामलों में लोगों ने आत्महत्या तक की है। सरकार ने इस विधेयक के जरिए समाज के हित को प्राथमिकता दी है, भले ही इससे राजस्व का नुकसान हो। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस विधेयक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह देश के युवाओं और कमजोर वर्गों को बचाने के लिए जरूरी है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में रियल मनी Gaming की पेशकश, प्रचार, सुविधा प्रदान करने और वित्तीय लेनदेन पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है। कोई भी व्यक्ति या कंपनी जो Online मनी Gaming की पेशकश करेगी, उसे तीन साल तक की जेल या एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। इन खेलों का प्रचार करने वालों को दो साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए सजा को और सख्त किया गया है, जिसमें तीन से पांच साल की जेल और दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी ऐसे खेलों से संबंधित लेनदेन की अनुमति नहीं होगी। यह कानून सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत गैरकानूनी प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने की शक्ति भी देता है। यह विधेयक एक राष्ट्रीय Online Gaming प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव करता है, जो Online Gaming की निगरानी करेगा। यह प्राधिकरण गेम्स को वर्गीकृत करेगा, उनकी पंजीकरण प्रक्रिया को देखेगा और शिकायतों का समाधान करेगा। यह यह भी तय करेगा कि कौन सा गेम मनी Gaming की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, यह प्राधिकरण ई-स्पोर्ट्स और सोशल Gaming जैसे शतरंज, सुडोकू और अन्य गैर-जुआ आधारित खेलों को बढ़ावा देगा। सरकार का कहना है कि ई-स्पोर्ट्स को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता दी जाएगी, और इसके लिए प्रशिक्षण अकादमियां, अनुसंधान केंद्र और प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की जाएंगी। ई-स्पोर्ट्स को 2027 में होने वाले पहले ओलंपिक ई-स्पोर्ट्स गेम्स में शामिल किया गया है, और भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में Online Gaming उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। 2020 में 36 करोड़ गेमर्स थे, जो 2024 तक बढ़कर 50 करोड़ से ज्यादा हो गए। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 15.5 करोड़ लोग फंतासी स्पोर्ट्स, रम्मी, पोकर और अन्य मनी Gaming में शामिल थे, जो 2023 की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इन खेलों में प्रतिदिन औसतन 11 करोड़ लोग हिस्सा लेते हैं। इस उद्योग का बाजार मूल्य 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, और यह हर साल 31,000 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न करता है। यह उद्योग जून 2022 तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित कर चुका है और 2 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां प्रदान करता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि इस उद्योग का एक तिहाई हिस्सा रियल मनी Gaming से आता है, जो समाज के लिए हानिकारक है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 45 करोड़ लोग हर साल 20,000 करोड़ रुपये गंवाते हैं, जिसके कारण कई परिवार आर्थिक संकट में पड़ जाते हैं। इन खेलों की लत ने युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, धोखाधड़ी और आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाओं को बढ़ावा दिया है। कुछ प्लेटफॉर्म्स पर मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी और आतंकी फंडिंग के आरोप भी लगे हैं। कई ऑफशोर ऑपरेटरों के कारण राज्य कानूनों को लागू करना मुश्किल हो जाता है।

इस विधेयक का Online Gaming उद्योग ने कड़ा विरोध किया है। ऑल इंडिया Gaming फेडरेशन (एआईजीएफ), ई-Gaming फेडरेशन (ईजीएफ) और फेडरेशन ऑफ इंडियन फंतासी स्पोर्ट्स (एफआईएफएस) ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस प्रतिबंध को वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यह विधेयक उद्योग के लिए “मौत का फरमान” साबित होगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रतिबंध 2 लाख नौकरियों को खतरे में डालेगा, 25,000 करोड़ रुपये के एफडीआई को प्रभावित करेगा और 20,000 करोड़ रुपये के कर राजस्व को नुकसान पहुंचाएगा। उद्योग का कहना है कि यह प्रतिबंध वैध और विनियमित प्लेटफॉर्म्स को बंद कर देगा, जिससे उपयोगकर्ता अवैध मटका नेटवर्क, ऑफशोर जुआ साइटों और गैर-विनियमित ऑपरेटरों की ओर बढ़ेंगे, जो बिना किसी उपभोक्ता संरक्षण या कर भुगतान के काम करते हैं।

उद्योग के कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म्स, जैसे ड्रीम11, मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल), और गेम्स24X7, इस प्रतिबंध से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ड्रीम11, जिसकी बाजार मूल्य 8 अरब डॉलर है, और एमपीएल, जिसकी कीमत 2.5 अरब डॉलर है, फंतासी स्पोर्ट्स और अन्य मनी Gaming के लिए जाने जाते हैं। ड्रीम11 भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक है और आईपीएल में फंतासी Gaming अधिकार रखता है। कई प्रमुख क्रिकेटर इन प्लेटफॉर्म्स का प्रचार करते हैं, जिन पर अब प्रतिबंध लग सकता है। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिबंध भारत की डिजिटल नवाचार और वैश्विक Gaming नेतृत्व की छवि को नुकसान पहुंचाएगा। विपक्ष ने भी इस विधेयक पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने इसे “मोदी सरकार की एक और गलत नीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध से राज्यों को राजस्व का नुकसान होगा, 2,000 से ज्यादा स्टार्टअप बंद हो सकते हैं और अवैध ऑफशोर नेटवर्क को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने तर्क दिया कि प्रतिबंध की जगह विनियमन बेहतर विकल्प होता।

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