झारखंड: डिलीवरी बॉय सूरज बने डिप्टी कलेक्टर, आर्थिक और सामजिक चुनौतियों से लोहा लेकर पूरी की जिद।

Jharkhand Special: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 25 जुलाई 2025 को संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के अंतिम परिणाम घोषित किए। इस परीक्षा में गिरिडीह के सूरज कुमार यादव ने

Aug 21, 2025 - 12:42
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झारखंड: डिलीवरी बॉय सूरज बने डिप्टी कलेक्टर, आर्थिक और सामजिक चुनौतियों से लोहा लेकर पूरी की जिद।
झारखंड: डिलीवरी बॉय सूरज बने डिप्टी कलेक्टर, आर्थिक और सामजिक चुनौतियों से लोहा लेकर पूरी की जिद।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 25 जुलाई 2025 को संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के अंतिम परिणाम घोषित किए। इस परीक्षा में गिरिडीह के सूरज कुमार यादव ने 110वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल कायम की है। आर्थिक तंगी और मुश्किल हालातों के बीच सूरज ने अपने सपने को हकीकत में बदला और अब वे डिप्टी कलेक्टर बनने जा रहे हैं। सूरज ने पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए स्विगी में डिलीवरी बॉय के रूप में काम किया और रैपिडो बाइक भी चलाई। उनकी यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के कारण अपने सपनों से हार मान लेते हैं। इस परीक्षा में कुल 342 उम्मीदवारों का चयन विभिन्न प्रशासनिक पदों, जैसे डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और स्टेट टैक्स ऑफिसर, के लिए हुआ है।

सूरज कुमार यादव झारखंड के गिरिडीह जिले के कपिलो गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से है। उनके पिता एक राजमिस्त्री हैं, और परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर रही है। कई बार घर में दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। इन तमाम परेशानियों के बावजूद सूरज ने हिम्मत नहीं हारी और सरकारी अधिकारी बनने का सपना देखा। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और जेपीएससी की तैयारी के लिए रांची का रुख किया। रांची में रहते हुए सूरज को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। घर से पैसे मिलना बंद हो गया, जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना पड़ा। इसके लिए सूरज ने स्विगी में डिलीवरी बॉय का काम शुरू किया। वे दिन में डिलीवरी करते और रात को पढ़ाई के लिए समय निकालते। इसके अलावा, उन्होंने रैपिडो बाइक चलाकर भी अतिरिक्त आय अर्जित की। सूरज की पत्नी पूनम ने भी उनका पूरा साथ दिया। जब सूरज ने पूनम से पूछा कि वे नौकरी करें या पढ़ाई पर ध्यान दें, तो पूनम ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया और घर के खर्च की जिम्मेदारी उठाने का भरोसा दिया।

  • जेपीएससी 2023 परीक्षा और परिणाम

जेपीएससी ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के लिए अधिसूचना 27 जनवरी 2024 को जारी की थी। प्रारंभिक परीक्षा 17 मार्च 2024 को हुई, जिसमें 7,011 उम्मीदवार सफल हुए। मुख्य परीक्षा 22 से 24 जून 2024 तक रांची में आयोजित की गई। इस परीक्षा में 864 उम्मीदवारों ने इंटरव्यू के लिए क्वालिफाई किया। मुख्य परीक्षा के परिणाम 21 मई 2025 को घोषित किए गए, लेकिन अंतिम परिणाम में 10 महीने की देरी हुई। इस देरी के कारण उम्मीदवारों ने रांची, हजारीबाग, धनबाद और गढ़वा जैसे जिलों में विरोध प्रदर्शन किए। अंतिम परिणाम 25 जुलाई 2025 को जेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट jpsc.gov.in पर जारी किए गए। इस परीक्षा में आशीष अक्षत ने पहली रैंक, अभय कुमार ने दूसरी रैंक और रवि रंजन कुमार ने तीसरी रैंक हासिल की। कुल 342 उम्मीदवारों का चयन विभिन्न प्रशासनिक पदों के लिए हुआ, जिनमें 207 डिप्टी कलेक्टर, 56 स्टेट टैक्स ऑफिसर और 35 पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद शामिल हैं। सूरज यादव ने 110वीं रैंक हासिल की और उन्हें डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए चुना गया।

सूरज का यह दूसरा प्रयास था, और इस बार उन्होंने न केवल मुख्य परीक्षा पास की, बल्कि इंटरव्यू में भी शानदार प्रदर्शन किया। इंटरव्यू के दौरान जब सूरज ने जेपीएससी बोर्ड को बताया कि वे स्विगी डिलीवरी बॉय के रूप में काम करते हैं, तो बोर्ड के सदस्य हैरान रह गए। कुछ सदस्यों को लगा कि सूरज सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद बोर्ड ने उनसे डिलीवरी बॉय के काम से जुड़े तकनीकी सवाल पूछे, जैसे ऑर्डर डिलीवरी का प्रोसेस, ग्राहक सेवा और समय प्रबंधन। सूरज ने सभी सवालों का जवाब आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ दिया, जिससे बोर्ड प्रभावित हुआ। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

सूरज का जीवन आसान नहीं था। उनके गांव कपिलो में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार सूरज को भूखे पेट सोना पड़ता था। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा। रांची में रहते हुए किराए, कोचिंग और किताबों का खर्च उठाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। स्विगी और रैपिडो में काम करके उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई का खर्च उठाया, बल्कि अपने परिवार की भी मदद की। सूरज की पत्नी पूनम ने भी उनकी मेहनत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2020 तक सूरज ने कॉल सेंटर में काम किया, लेकिन जेपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। पूनम ने घर की जिम्मेदारियां संभालीं और सूरज को पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी और परिवार के समर्थन को दिया है।

सूरज की कहानी सोशल मीडिया और समाचारों में खूब चर्चा में रही। उनके गांव के मुखिया ने परिणाम आने के बाद उनके संघर्ष की कहानी साझा की, जिसे बाद में मीडिया और कोचिंग संस्थानों ने वायरल कर दिया। सूरज की इस उपलब्धि ने न केवल उनके गांव बल्कि पूरे झारखंड में युवाओं को प्रेरित किया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास से कोई भी मुश्किल लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सूरज की तारीफ करते हुए लिखा कि उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। एक यूजर ने लिखा, "सूरज ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती।" एक अन्य यूजर ने उनकी पत्नी पूनम की तारीफ करते हुए कहा, "पूनम जैसी जीवनसाथी हर किसी को चाहिए, जिन्होंने सूरज का हर कदम पर साथ दिया।"

जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के दो पेपर होते हैं, जिनमें प्रत्येक 200 अंकों का होता है। मुख्य परीक्षा में छह पेपर होते हैं, जिनमें सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी के पेपर क्वालिफाइंग प्रकृति के होते हैं। साक्षात्कार 100 अंकों का होता है, और अंतिम मेरिट सूची मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है। उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा में कम से कम 40% अंक लाने होते हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को इसमें छूट दी जाती है।

सूरज कुमार यादव की कहानी मेहनत, लगन और संघर्ष की जीती-जागती मिसाल है। एक छोटे से गांव से निकलकर, आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए, सूरज ने जेपीएससी 2023 में 110वीं रैंक हासिल की और डिप्टी कलेक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया। उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि लाखों युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि कठिन परिस्थितियां भी सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बन सकतीं।

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