06 फरवरी 2026: भारतभर में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, दिल्ली-मुंबई में महंगा तो लखनऊ-असम सस्ता – जानिए सभी शहरों के लेटेस्ट भाव।
भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। पिछले कई महीनों से कीमतें
आज 06 फरवरी 2026 को भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। पिछले कई महीनों से कीमतें लगातार स्थिर बनी हुई हैं, जिसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता (लगभग 68-70 डॉलर प्रति बैरल), रुपए की विनिमय दर, सरकारी टैक्स पॉलिसी और कोई नया आयात शुल्क परिवर्तन न होना है। पेट्रोलियम कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) रोज सुबह 6 बजे भाव अपडेट करती हैं, लेकिन आज ज्यादातर शहरों में 0.00 रुपये का परिवर्तन दर्ज किया गया।
goodreturns.in, mypetrolprice.com, BankBazaar, Financial Express, NDTV, Moneycontrol और PPAC जैसे भरोसेमंद स्रोतों से क्रॉस-वेरिफिकेशन के बाद ये आंकड़े तैयार किए गए हैं। छोटे शहरों (जैसे बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, हरदोई, आगरा, कानपुर) में भाव राज्य की राजधानी (लखनऊ) या दिल्ली के बहुत करीब होते हैं, क्योंकि फ्रेट चार्ज और लोकल टैक्स में मामूली अंतर होता है। नोएडा दिल्ली एनसीआर का हिस्सा होने से दिल्ली के भाव के लगभग समान है। असम में गुवाहाटी, मध्य प्रदेश में भोपाल/इंदौर, राजस्थान में जयपुर, तमिलनाडु में चेन्नई के भाव लिए गए हैं। पुणे महाराष्ट्र राज्य का हिस्सा होने से मुंबई के करीब लेकिन थोड़ा सस्ता है।
ये भाव बिना किसी अतिरिक्त शुल्क (जैसे सर्विस चार्ज) के हैं और प्रति लीटर में दिए गए हैं। कीमतें राज्य के वैट/एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और परिवहन लागत के कारण भिन्न होती हैं। उत्तर भारत में टैक्स कम होने से दिल्ली-लखनऊ सस्ते हैं, जबकि मुंबई-कोलकाता-चेन्नई में उच्च टैक्स के कारण महंगे।
आज के प्रमुख शहरों और राज्यों में पेट्रोल व डीजल के भाव (06 फरवरी 2026, Rs.. प्रति लीटर):
|
स्थान |
पेट्रोल (Rs../लीटर) |
डीजल (Rs../लीटर) |
|
दिल्ली / नोएडा |
94.77 - 94.81 |
87.67 - 87.71 |
|
लखनऊ / कानपुर / आगरा / बरेली / शाहजहांपुर / बाराबंकी / मुरादाबाद / हरदोई |
94.69 - 94.70 |
87.80 - 87.81 |
|
कोलकाता |
105.20 (105.41 तक) |
92.00 - 92.02 |
|
मुंबई |
103.49 - 103.54 |
90.01 - 90.03 |
|
पुणे |
102.80 - 103.00 (अनुमानित राज्य समायोजन) |
89.50 - 90.00 (अनुमानित) |
|
चेन्नई / तमिलनाडु |
100.79 - 101.06 |
92.38 - 92.61 |
|
गुवाहाटी / असम |
98.28 |
89.50 |
|
भोपाल / मध्य प्रदेश |
106.17 |
91.57 |
|
जयपुर / राजस्थान |
104.62 |
90.12 |
(स्रोत: goodreturns.in मुख्य पेज और डीजल पेज, mypetrolprice.com, BankBazaar, Financial Express आदि से वेरिफाईड। मामूली Rs..0.01-0.20 का अंतर अपडेट टाइम या सटीक लोकेशन से हो सकता है। छोटे शहरों में स्थानीय पंप पर 0.10-0.50 रुपये का अंतर संभव।)
भारतीय ईंधन बाजार पूरी तरह नियंत्रित है लेकिन अब दैनिक आधार पर अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट और राज्य सरकारों द्वारा लगाए वैट पर निर्भर करता है। फरवरी 2025 से पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादातर शहरों में अपरिवर्तित हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है लेकिन राजकोष के लिए चुनौती भी, क्योंकि सरकार को एक्साइज ड्यूटी से भारी राजस्व मिलता है।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल सबसे सस्ते में से एक है क्योंकि केंद्र सरकार की नीतियों और कम वैट का फायदा मिलता है। नोएडा में दिल्ली से मात्र 0.03-0.07 रुपये का अंतर है। उत्तर प्रदेश के सभी सूचीबद्ध शहर (लखनऊ, कानपुर, आगरा, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, हरदोई) में भाव लगभग एक समान हैं। ये शहर लखनऊ या दिल्ली से सप्लाई चेन पर निर्भर करते हैं, इसलिए अंतर न्यूनतम होता है। शादी-त्योहार के मौसम में डिमांड बढ़ने से कभी-कभी छोटा उतार-चढ़ाव आ सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिरता बनी हुई है।
कोलकाता में सबसे महंगा पेट्रोल है क्योंकि पश्चिम बंगाल में उच्च वैट और अन्य लेवी लगती हैं। मुंबई में महाराष्ट्र की पॉलिसी के कारण पेट्रोल-डीजल दोनों महंगे हैं, लेकिन पुणे जैसे दूसरे शहरों में फ्रेट कम होने से थोड़ा राहत मिलती है। चेन्नई और पूरे तमिलनाडु में डीजल अपेक्षाकृत महंगा है, जबकि पेट्रोल मध्यम स्तर पर है। पूर्वोत्तर के असम (गुवाहाटी) में पेट्रोल सस्ता है क्योंकि लोकल रिफाइनरी (नुमालीगढ़ आदि) का प्रभाव पड़ता है।
मध्य प्रदेश में भोपाल/इंदौर जैसे शहरों में पेट्रोल सबसे महंगे शहरों में गिना जाता है, जबकि राजस्थान (जयपुर) में मध्यम स्तर है। कुल मिलाकर, देश में पेट्रोल की औसत कीमत 100-105 रुपये और डीजल 88-92 रुपये के आसपास बनी हुई है।
ईंधन की कीमतें उपभोक्ताओं पर सीधा असर डालती हैं। महंगे ईंधन से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे किराना सामान से लेकर ट्रांसपोर्ट तक सब महंगा हो जाता है। किसान, छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सरकार ने पिछले वर्षों में एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके राहत दी थी, लेकिन अब स्थिरता का फायदा आम जनता को मिल रहा है। आने वाले समय में अगर क्रूड ऑयल 75 डॉलर पार करता है या जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ता है तो कीमतें बढ़ सकती हैं।
वाहन मालिकों को सलाह है कि ईंधन दक्षता बढ़ाएं – नियमित सर्विस, सही टायर प्रेशर, अनावश्यक एसी का इस्तेमाल न करें। CNG या इलेक्ट्रिक वाहनों पर विचार करें जहां उपलब्ध हो। डिजिटल पेमेंट से पंप पर छूट भी मिलती है। हमेशा BIS प्रमाणित पंप से ही ईंधन भरवाएं और रसीद लें।
ऐतिहासिक रूप से देखें तो 2020-21 में कोविड के दौरान कीमतें गिर गई थीं, फिर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध से उछाल आया था। 2026 में स्थिरता अच्छा संकेत है लेकिन लंबे समय में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना जरूरी है। राज्यवार टैक्स की तुलना में दिल्ली-यूपी सबसे अनुकूल हैं, जबकि दक्षिण और पश्चिमी राज्य महंगे हैं।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर OPEC+ उत्पादन बढ़ाता है या वैश्विक मांग कम होती है तो आगे और स्थिरता या गिरावट संभव है। उपभोक्ता को लोकल पंप पर रोज चेक करना चाहिए क्योंकि छोटे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
(यह रिपोर्ट goodreturns.in के 06 फरवरी 2026 अपडेट, mypetrolprice.com, BankBazaar, Financial Express, NDTV और अन्य स्रोतों से पूर्ण वेरिफिकेशन के बाद तैयार की गई है। कोई त्रुटि से बचने के लिए मल्टी-सोर्स क्रॉस-चेक किया गया। कीमतें बदलावशील हैं, इसलिए खरीदते समय लोकल पंप कन्फर्म करें।)
ईंधन मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया काफी जटिल है। बेस प्राइस अंतरराष्ट्रीय क्रूड से शुरू होता है, फिर रिफाइनरी मार्जिन, इंपोर्ट ड्यूटी, एक्साइज, राज्य वैट, डीलर कमीशन और फ्रेट जोड़कर फाइनल रिटेल प्राइस बनता है। दिल्ली में सबसे कम टैक्स स्ट्रक्चर है जबकि मुंबई में 20-25% तक वैट प्रभावी है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में एक समान सप्लाई चेन होने से सभी शहरों के भाव करीब-करीब समान रहते हैं। आगरा, कानपुर जैसे टूरिस्ट हब में कभी-कभी पीक सीजन में मामूली बढ़ोतरी होती है लेकिन फिलहाल नहीं। बरेली, मुरादाबाद जैसे औद्योगिक शहरों में ट्रक ट्रांसपोर्ट डिमांड ज्यादा होने से डीजल की खपत अधिक है।
पूर्वी भारत (कोलकाता) में पोर्ट हैंडलिंग लागत और राज्य टैक्स के कारण महंगा है। दक्षिण भारत (चेन्नई) में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की वजह से डीजल डिमांड हाई है। असम में लोकल प्रोडक्शन से फायदा, लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में परिवहन मुश्किल होने से कभी फ्रेट बढ़ जाता है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान कृषि प्रधान हैं, इसलिए डीजल सब्सिडी या किसान योजनाएं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। कुल मिलाकर, स्थिर भाव से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण है।
उपभोक्ता टिप्स: कारपूलिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिक स्कूटर अपनाएं। बजट में ईंधन खर्च 10-15% तक रखें। लंबी अवधि में EV या हाइब्रिड वाहन बेहतर निवेश हैं।
What's Your Reaction?







