उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025- बीजेपी की शानदार जीत, सीएम धामी के नेतृत्व और विकास कार्यों को मिला जनता का समर्थन।
Political: उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने 12 में से....
उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने 12 में से 10 जिला पंचायत अध्यक्ष सीटों, लगभग 70% ब्लॉक प्रमुख और 85% ग्राम प्रधान पदों पर जीत हासिल की। बीजेपी ने इस सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और उनकी जनकल्याणकारी नीतियों को दिया है। पार्टी का कहना है कि ये नतीजे जनता के भरोसे और उनके विकास कार्यों का परिणाम हैं। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने कुछ सीटों पर जीत दर्ज की और बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- पंचायत चुनाव 2025: बीजेपी का दबदबा
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के नतीजे 31 जुलाई और 14 अगस्त को घोषित हुए। इन चुनावों में जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान के कुल 10,915 पदों के लिए मतदान हुआ। 47 लाख मतदाताओं ने इसमें हिस्सा लिया, जिसमें 74.42% महिलाओं और 64.23% पुरुषों ने वोट डाले। नैनीताल में 74.25% मतदान हुआ, जो राज्य औसत से अधिक था।
बीजेपी ने 12 में से 10 जिला पंचायत अध्यक्ष सीटों पर कब्जा जमाया। इनमें रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, चंपावत, टिहरी, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर शामिल हैं। नैनीताल में मतगणना दोबारा होने के कारण नतीजे रुके हुए हैं, जबकि हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 में होंगे। देहरादून में कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद जीते।
ब्लॉक प्रमुख के 89 पदों में से बीजेपी ने 70% से अधिक सीटें हासिल कीं, जबकि ग्राम प्रधान के 7,499 पदों में से 85% पर बीजेपी समर्थित प्रत्याशी जीते। बीजेपी के सीधे उम्मीदवारों को 101 जिला पंचायत सीटें मिलीं, और समर्थित उम्मीदवारों को 23 सीटें, यानी कुल 124 सीटें। वहीं, कांग्रेस को 64 सीटें और उनके समर्थित उम्मीदवारों को 30 सीटें, यानी कुल 94 सीटें मिलीं।
- सीएम धामी का नेतृत्व और विकास कार्य
बीजेपी ने इस जीत को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की रणनीति और विकास कार्यों का नतीजा बताया। धामी ने खटीमा में मतदान कर जनता से भागीदारी की अपील की थी। उन्होंने जीत के बाद सभी विजेताओं को बधाई दी और कहा, "यह जनता के विश्वास और संगठन की शक्ति का प्रमाण है। हमारी सरकार ने सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में काम किया, जिसे जनता ने सराहा।"
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड प्रगति के पथ पर है। पंचायत चुनाव की जीत 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हमारा आत्मविश्वास बढ़ाएगी।" बीजेपी का दावा है कि उनकी नीतियों, जैसे 3.5 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार योजना, स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप्स, और परमाणु ऊर्जा विस्तार, ने जनता का भरोसा जीता।
- उल्लेखनीय जीत और युवा नेतृत्व
चुनाव में कई रोचक नतीजे सामने आए। चमोली में 21 वर्षीय प्रियंका नेगी सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान बनीं। उन्होंने गैरसैंण विकासखंड के सारकोट गांव से जीत हासिल की, जिसे सीएम धामी ने गोद लिया है। पौड़ी के पाबौ ब्लॉक में 22 वर्षीय साक्षी ने बी.टेक के बाद गांव लौटकर प्रधान पद जीता। नैनीताल के भीमताल में राधा कुलियाल तीसरी बार ग्राम प्रधान बनीं।
चमोली के बणद्वारा में 23 वर्षीय नितिन टॉस से प्रधान बने। अल्मोड़ा के द्वाराहाट में दोनों प्रत्याशियों को बराबर वोट मिलने पर लॉटरी से कल्पना बिष्ट विजयी हुईं। बागेश्वर में लच्छू भाई ने क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में जीत दर्ज की, जिसने क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई।
- कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने देहरादून में जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद जीतकर वापसी की। सुखविंदर कौर अध्यक्ष और अभिषेक सिंह उपाध्यक्ष बने। कांग्रेस ने बीजेपी पर सत्ता और धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। चमोली में हार के बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी ने इस्तीफा दे दिया। नैनीताल में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान हिंसा हुई, जिसमें एक ग्रामीण घायल हो गया। कांग्रेस ने बीजेपी पर जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण का आरोप भी लगाया। कांग्रेस ने कहा, "बीजेपी ने धन बल और सत्ता के दम पर जीत हासिल की। देहरादून में हमारी जीत जनता का जवाब है।" हालांकि, कुछ एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि कांग्रेस ने चमोली में 12 सीटें जीतीं, लेकिन विश्वसनीय स्रोतों ने इसे पुष्ट नहीं किया।
बीजेपी ने चार जिला पंचायत अध्यक्ष और 11 ब्लॉक प्रमुख निर्विरोध जीते, जो उनकी मजबूत संगठनात्मक रणनीति को दर्शाता है। पार्टी ने प्रत्याशी चयन में जातीय, भौगोलिक और सामाजिक संतुलन बनाया। धामी की सक्रियता, जैसे उत्तरकाशी में धराली आपदा के बाद राहत कार्यों की कमान संभालना, ने भी जनता का भरोसा बढ़ाया।
कुछ क्षेत्रों में चुनाव के दौरान विवाद हुए। नैनीताल के बेतालघाट में ब्लॉक प्रमुख चुनाव में गोलीबारी की घटना हुई। उधम सिंह नगर के गदरपुर में क्षेत्र पंचायत सदस्यों को लेकर दो गुटों में झड़प हुई, जिसे पुलिस ने शांत किया। भारी बारिश के बीच मतगणना जारी रही, जिससे प्रक्रिया में देरी हुई। उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 में बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ साबित की। 10 जिला पंचायत अध्यक्ष, 70% ब्लॉक प्रमुख और 85% ग्राम प्रधान पदों पर जीत ने पार्टी के जनाधार को मजबूत किया। सीएम धामी के नेतृत्व और विकास कार्यों को जनता का समर्थन मिला। हालांकि, कांग्रेस ने देहरादून में जीत और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा दिखाकर चुनौती पेश की। ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाले हैं, लेकिन विपक्ष के लिए भी सबक हैं।
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