Bihar Election 2025- तेज प्रताप यादव ने RJD से तोड़ा नाता, भगवान के सामने लिया संकल्प, महुआ से लड़ेंगे नया चुनाव
तेज प्रताप यादव का RJD से यह रिश्ता लंबे समय से तनावपूर्ण रहा है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे के रूप में तेज प्रताप ने 2015 में महुआ से पहली बार विधानसभा चुनाव
बिहार की राजनीति में 20 सितंबर 2025 को एक बड़ा मोड़ आ गया जब लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से पूरी तरह नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया। टाइम्स नाउ नवभारत को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में तेज प्रताप ने कहा कि उन्होंने भगवान के सामने संकल्प लिया है कि अब कभी RJD में वापसी नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, माता-पिता का स्थान अलग है और पार्टी का स्थान अलग। माता-पिता हमेशा पूजनीय रहेंगे, लेकिन RJD से मेरा कोई रिश्ता नहीं रहेगा। यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले आया है, जिससे यादव परिवार और RJD में हलचल मच गई है। तेज प्रताप ने न केवल पुरानी पार्टी को अलविदा कहा, बल्कि अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल से महुआ विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने का भी एलान किया। प्राइम टीवी इंडिया और आजतक जैसी संस्थाओं ने इसकी प्रमुखता से कवरेज की, जहां विशेषज्ञों का मानना है कि यह परिवारिक कलह को और गहरा कर सकता है।
तेज प्रताप यादव का RJD से यह रिश्ता लंबे समय से तनावपूर्ण रहा है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे के रूप में तेज प्रताप ने 2015 में महुआ से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। वे RJD के युवा चेहरे थे और सामाजिक न्याय की राजनीति में सक्रिय रहे। लेकिन 2020 के चुनाव में उन्हें महुआ की बजाय हसनपुर सीट से टिकट दिया गया, जिससे वे नाराज हो गए। हसनपुर से वे जीत तो गए, लेकिन पार्टी के फैसले से असंतोष बढ़ता गया। मई 2025 में एक प्रेम प्रसंग के विवाद के बाद लालू यादव ने उन्हें परिवार से बेदखल करने के साथ ही छह साल के लिए RJD से निष्कासित कर दिया। लालू ने कहा था कि तेज प्रताप की हरकतों से पार्टी की छवि खराब हो रही है। इस फैसले को RJD ने अनुशासन की मिसाल बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, BJP और JDU ने इसे यादव परिवार की फूट का सबूत बताया।
निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने खुद को राजनीति से अलग कर लिया। वे सोशल मीडिया पर भगवान शिव की भक्ति के वीडियो शेयर करने लगे। जून 2025 में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे शिवलिंग के सामने ध्यानमग्न दिखे। कैप्शन था, अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का। हिंदुस्तान की रिपोर्ट में कहा गया कि यह वीडियो काशी विश्वनाथ मंदिर का था, जिस पर मंदिर प्रशासन ने जांच के आदेश दिए। लेकिन जुलाई में तेज प्रताप ने फिर राजनीति में हुंकार भरी। डीएनपी इंडिया हिंदी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने लालू की तस्वीर के सामने कहा कि अंधेरा जितना गहरा होगा, प्रकाश उतना ही तेज होगा। उन्होंने RJD पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप लगाए। प्राइम टीवी इंडिया के अनुसार, उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन ने उन्हें दरकिनार कर दिया, जबकि वे लालू के असली वारिस हैं।
20 सितंबर का इंटरव्यू इस तनाव का चरम था। टाइम्स नाउ नवभारत में तेज प्रताप ने कहा कि वे नई शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई है, जो सामाजिक न्याय और जनकल्याण पर आधारित होगी। महुआ सीट से वे निर्दलीय या अपनी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधा। कहा कि तेजस्वी बिहार के अधिकार की बात करते हैं, लेकिन अपने भाई को अधिकार नहीं देते। RJD की वजह से ही कांग्रेस को बिहार में पैर जमाने का मौका मिला। तेज प्रताप ने लालू-राबड़ी को भी निशाने पर लिया, कहा कि परिवार में साजिशें चल रही हैं। उन्होंने जयचंद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो परिवारिक विश्वासघात की ओर इशारा करता है। इंटरव्यू में वे भावुक हो गए और कहा कि भगवान के सामने लिया संकल्प कभी नहीं तोड़ेंगे।
RJD की ओर से तीखा जवाब आया। तेजस्वी यादव ने समस्तीपुर में प्रभात खबर को दिए इंटरव्यू में कहा, RJD में जिसकी सदस्यता है, वही चुनाव लड़ेगा। बड़े भाई के प्रचार में जाने के सवाल पर बोले, हमारी अपनी पार्टी है और अपनी विचारधारा। यह पहली बार था जब तेजस्वी ने तेज प्रताप पर खुलकर बयान दिया। लालू प्रसाद ने चुप्पी साधी, लेकिन RJD प्रवक्ता ने कहा कि परिवारिक मामला है, पार्टी अनुशासन पर कायम रहेगी। प्रभात खबर के अनुसार, इस बयान से भाइयों के बीच दूरी और बढ़ गई। BJP प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने तंज कसा कि परिवारवादी पार्टी सड़क पर आ गई। JDU ने कहा कि यह RJD की आंतरिक कलह है, जो विपक्ष को फायदा देगी।
यह घटना बिहार चुनाव 2025 के समीकरण बदल सकती है। RJD का वोटबैंक मुख्य रूप से मुस्लिम-यादव (MY) पर टिका है। 2015 और 2020 में RJD सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सीएम पद नहीं मिला। हिंदी वनइंडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि तेज प्रताप का अलग होना MY समीकरण को कमजोर कर सकता है। अगर वे महुआ से लड़ते हैं, जहां वे पहले जीते थे, तो RJD के वोट बंट सकते हैं। तेज प्रताप के समर्थक, जो युवा और यादव वोटर हैं, बगावत कर सकते हैं। विपक्ष NDA इसका फायदा उठा रहा है। नीतीश कुमार ने कहा कि परिवारवाद की राजनीति का अंत हो रहा है। राहुल गांधी की बिहार यात्रा के दौरान तेज प्रताप का नाम न आने से कांग्रेस को भी असहजता हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज प्रताप निर्दलीय लड़ते हैं तो महुआ में रोचक मुकाबला होगा।
तेज प्रताप का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2018 में पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक की अर्जी दी, जिससे विवाद हुआ। 2019 में छात्र RJD के संरक्षक पद से इस्तीफा दिया। 2022 में इफ्तार पार्टी में कार्यकर्ता से मारपीट के आरोप लगे, तो लालू को इस्तीफे की धमकी दी। लेकिन मई 2025 का निष्कासन सबसे बड़ा झटका था। लाइव हिंदुस्तान के अनुसार, लैंड फॉर जॉब केस में भी वे आरोपी बने, लेकिन मार्च 2025 में जमानत मिली। इन सबके बावजूद तेज प्रताप की लोकप्रियता बनी हुई है। उनके भक्ति वीडियो लाखों व्यूज पाते हैं। सोशल मीडिया पर वे सक्रिय हैं, जहां फॉलोअर्स उन्हें बेबाक नेता मानते हैं।
RJD अब डैमेज कंट्रोल में जुटा है। पार्टी ने कहा कि तेज प्रताप का फैसला व्यक्तिगत है, संगठन मजबूत है। लेकिन आंतरिक स्रोतों के अनुसार, चिंता है। यादव वोटों का बंटवारा RJD के लिए नुकसानदेह होगा। तेजस्वी अपनी बिहार अधिकार यात्रा पर हैं, जहां वे आरक्षण और जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं। 18 सितंबर को एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 20 साल पुरानी खटारा सरकार की विदाई का समय आ गया। लेकिन भाई का बयान उनकी यात्रा पर साया डाल रहा है। विपक्ष AIMIM जैसे दलों को मुस्लिम वोट बांटने का मौका दे रहा है।
यह घटना बिहार की राजनीति को नया रंग दे रही है। परिवारवाद पर सवाल उठ रहे हैं। लालू परिवार, जो बिहार की सियासत का केंद्र रहा, अब फूट का शिकार लग रहा है। तेज प्रताप की बगावत से नई बहस छिड़ गई है कि क्या वे लालू के असली उत्तराधिकारी हैं। सोशल मीडिया पर #TejPratapRevolt जैसे ट्रेंड चल रहे हैं। लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि परिवार पहले, पार्टी बाद। एक यूजर ने कहा, तेज प्रताप का संकल्प सच्चा लगता है। दूसरा बोला, RJD का अंत नजदीक है। विशेषज्ञ कहते हैं कि चुनाव में वोटर तय करेंगे कि यह ड्रामा है या मास्टरस्ट्रोक।
तेज प्रताप अब जनशक्ति जनता दल को मजबूत करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता की आवाज बनेगी। महुआ में उनका पुराना आधार है, जहां वे 2015 में भारी मतों से जीते। अगर वे निर्दलीय लड़ते हैं, तो RJD उम्मीदवार को चुनौती देंगे। बिहार चुनाव अक्टूबर-नवंबर में हैं, इसलिए हलचल तेज है। उम्मीद है कि यह विवाद शांत हो, लेकिन फिलहाल राजनीति गरम है। लालू परिवार को एकजुट होने की जरूरत है, वरना विपक्ष फायदा उठाएगा। तेज प्रताप का यह कदम बिहार को नई दिशा दे सकता है।
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