भीषण गर्मी के मौसम में AC के सही इस्तेमाल से कम करें बिजली की खपत, जेब पर नहीं पड़ेगा भारी बोझ
बिजली के बिल को कम रखने में एसी के साथ सीलिंग फैन यानी छत के पंखे का जुगलबंदी के रूप में इस्तेमाल करना एक बेहद ही कारगर रणनीति साबित होता है। जब आप कमरे में एसी ऑन करते हैं, तो उसके साथ ही पंखे को भी हल्की या मध्यम गति पर चला देना चाहिए। ऐसा करने से एसी
- कूलिंग और बचत का बेहतरीन तालमेल बनाने के लिए अपनाएं यह आसान उपाय, कमरे के तापमान को सही डिग्री पर सेट करना है सबसे जरूरी
- नियमित मेंटेनेंस और टाइमर का स्मार्ट उपयोग बचाएगा आपके हजारों रुपये, ठंडी हवा के साथ-साथ घर के बजट को भी मिलेगी बड़ी राहत
गर्मियों के मौसम की शुरुआत होते ही देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, जिससे बचने के लिए घरों और दफ्तरों में AC यानी एसी का इस्तेमाल एक अनिवार्य जरूरत बन जाता है। चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोग दिन-रात एसी चलाते हैं, लेकिन इस आराम के साथ ही महीने के अंत में आने वाला भारी-भरकम बिजली का बिल आम आदमी के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ देता है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग एसी को इस तरह से चलाते हैं जिससे बिजली की बर्बादी बहुत अधिक होती है और कूलिंग भी उतनी अच्छी नहीं मिल पाती है। कुछ बेहद ही आसान और व्यावहारिक उपायों को अपनी रोजमर्रा की आदतों में शामिल करके आप एसी की ठंडी हवा का आनंद भी ले सकते हैं और अपने बिजली के बिल को भी काफी हद तक नियंत्रित रख सकते हैं।
एसी चलाते समय बिजली बचाने का सबसे पहला और बुनियादी नियम है तापमान का सही चयन करना। अधिकांश लोग कमरे को जल्दी ठंडा करने की चाहत में एसी का रिमोट उठाते ही तापमान को 16 या 18 डिग्री सेल्सियस पर सेट कर देते हैं, जो कि पूरी तरह से एक गलत तरीका है। विज्ञान और तकनीकी अध्ययनों के अनुसार, मानव शरीर के लिए 24 डिग्री से लेकर 26 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सबसे आरामदायक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। जब आप एसी को 24 डिग्री पर चलाते हैं, तो इसके कंप्रेसर पर बहुत अधिक दबाव नहीं पड़ता है और वह कमरे को मनचाहा ठंडा करने के बाद ऑटोमैटिक तरीके से कट-ऑफ हो जाता है। इसके विपरीत, बेहद कम तापमान सेट करने पर कंप्रेसर लगातार बिना रुके चलता रहता है, जिससे बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की बढ़ोतरी करने से लगभग छह प्रतिशत तक बिजली की बचत की जा सकती है।
बिजली के बिल को कम रखने में एसी के साथ सीलिंग फैन यानी छत के पंखे का जुगलबंदी के रूप में इस्तेमाल करना एक बेहद ही कारगर रणनीति साबित होता है। जब आप कमरे में एसी ऑन करते हैं, तो उसके साथ ही पंखे को भी हल्की या मध्यम गति पर चला देना चाहिए। ऐसा करने से एसी द्वारा छोड़ी गई ठंडी हवा कमरे के हर कोने में बहुत तेजी से और समान रूप से फैल जाती है। पंखा चलने की वजह से कमरे का वेंटिलेशन बेहतर होता है और हवा का प्रवाह बढ़ने से कमरा जल्दी ठंडा महसूस होने लगता है। इस स्थिति में आप एसी का तापमान 26 डिग्री पर रखकर भी बेहद शानदार कूलिंग का अनुभव कर सकते हैं, क्योंकि पंखा उस ठंडक को पूरे कमरे में रोटेट करता रहता है, जिससे कंप्रेसर को कम मेहनत करनी पड़ती है और बिजली का मीटर तेजी से नहीं भागता।
थर्मल लोड को कम करना है आवश्यक
कमरे के भीतर की गर्मी को बाहर निकालने के लिए एसी को बहुत अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। यदि हम बाहरी गर्मी को कमरे में आने से रोक दें और अंदर के ऊष्मीय भार को कम कर दें, तो मशीन की कार्यक्षमता बढ़ जाती है और वह बेहद कम बिजली खाकर भी बेहतरीन परिणाम देने लगती है।
घर की बनावट और कमरे के भीतर का वातावरण भी एसी की परफॉर्मेंस और बिजली की खपत को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है। एसी चलाने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कमरे के सभी दरवाजे, खिड़कियां और वेंटिलेटर पूरी तरह से बंद हों ताकि बाहर की गर्म हवा अंदर न आ सके और अंदर की कूलिंग बाहर न निकले। इसके अलावा, गर्मियों के दिनों में खिड़कियों पर गहरे रंग के या मोटे थर्मल पर्दे लगाना बहुत फायदेमंद होता है, जो सूरज की सीधी और गर्म किरणों को कमरे के भीतर आने से रोकते हैं। कमरे के अंदर मौजूद अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे भारी लाइटें, कंप्यूटर या टीवी भी चलते समय गर्मी पैदा करते हैं, इसलिए एसी चलते समय अनावश्यक लाइटों को बंद रखना चाहिए ताकि कमरे का तापमान कम रहे और एसी को बेवजह मशक्कत न करनी पड़े।
AC की नियमित सर्विसिंग और मेंटेनेंस एक ऐसा बिंदु है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह बिजली बचाने का एक मुख्य स्तंभ है। एसी के भीतर लगे एयर फिल्टर समय के साथ हवा में मौजूद धूल और गंदगी को सोखते रहते हैं, जिससे उन पर धूल की एक मोटी परत जम जाती है। जब फिल्टर गंदे हो जाते हैं, तो हवा का प्रवाह रुकने लगता है और कमरे को ठंडा करने के लिए इंदौर और आउटडोर यूनिट को सामान्य से दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है। हर 15 दिनों में एक बार एसी के फिल्टर को निकालकर साफ पानी से खुद ही धो लेना चाहिए। इसके अलावा, सीजन की शुरुआत में किसी पेशेवर तकनीशियन से एसी की डीप सर्विसिंग करानी चाहिए ताकि कूलेंट गैस का प्रेशर सही रहे और कंडेनसर कॉइल्स साफ रहें, जिससे बिजली की खपत बेहद कम हो जाती है।
आधुनिक तकनीक से लैस AC में कई तरह के स्मार्ट फीचर्स और मोड्स दिए होते हैं, जिनका सही इस्तेमाल करके पैसों की बड़ी बचत की जा सकती है। उदाहरण के लिए, रात में सोते समय हमेशा एसी के 'स्लीप मोड' या 'टाइमर' का उपयोग करना चाहिए। रात के समय जैसे-जैसे वातावरण का तापमान प्राकृतिक रूप से कम होता है, स्लीप मोड स्वचालित रूप से हर घंटे एसी के तापमान को एक-एक डिग्री बढ़ा देता है, जिससे सोते समय आपको अत्यधिक ठंड भी नहीं लगती और बिजली भी बचती है। इसी तरह, आप टाइमर सेट कर सकते हैं ताकि सुबह के वक्त जब मौसम थोड़ा ठंडा हो जाए, तो एसी अपने आप बंद हो जाए। इसके अतिरिक्त, उमस भरे मौसम में 'ड्राय मोड' और सामान्य दिनों में 'इको मोड' का चयन करना सीधे तौर पर बिजली के बिल को कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
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