नेबुलाइजर देते समय छोटी गलती भी बच्चे की सांस को भारी बना सकती है: डॉक्टरों की चेतावनी
नेबुलाइजर देते समय बच्चे को सीधा बैठाना या लेटाकर ऊपर की ओर रखना जरूरी है। बच्चे को रोने या चिल्लाने न दें क्योंकि रोने से सांस तेज और छोटी हो जाती है जिससे दवा फेफड़ों तक न
बच्चों में सांस की तकलीफ, इन्फेक्शन या एलर्जी होने पर नेबुलाइजर दवा को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाने का प्रभावी तरीका है। यह डिवाइस दवा को बारीक धुंध में बदलकर बच्चे को सांस के जरिए ग्रहण करने देता है। सही इस्तेमाल से दवा फेफड़ों की गहराई तक पहुंचती है और सांस की राहत मिलती है। कई माता-पिता नेबुलाइजर देते समय छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं जिससे दवा का पूरा फायदा नहीं मिलता या स्थिति बिगड़ सकती है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि मलिक के अनुसार नेबुलाइजर का सही तरीका अपनाना जरूरी है ताकि बच्चा सुरक्षित रहे। नेबुलाइजर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए और गलत तरीके से देने से दवा गले या मुंह में अटक सकती है।
नेबुलाइजर देते समय बच्चे को सीधा बैठाना या लेटाकर ऊपर की ओर रखना जरूरी है। बच्चे को रोने या चिल्लाने न दें क्योंकि रोने से सांस तेज और छोटी हो जाती है जिससे दवा फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती। बच्चे को शांत रखने के लिए उपचार को रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। मास्क को बच्चे के चेहरे पर अच्छी तरह फिट करें ताकि कोई हवा बाहर न निकले। मास्क को 2 सेमी दूर रखने से दवा की मात्रा 40 से 85 प्रतिशत तक कम हो जाती है। बच्चे को मास्क से दूर रखकर ब्लो-बाय तरीके से न दें क्योंकि इससे दवा बर्बाद होती है।
दवा तैयार करने में गलती न करें। दवा को बहुत ज्यादा या कम पतला न करें क्योंकि इससे कणों का आकार गलत हो जाता है और दवा गले में अटक जाती है। हमेशा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा और मात्रा का इस्तेमाल करें। पानी की जगह 0.9 प्रतिशत सलाइन का उपयोग करें। स्टेरॉयड, ब्रोंकोडाइलेटर या अन्य दवाओं को बिना सलाह के न मिलाएं। नेबुलाइजर को हर उपयोग के बाद अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर गर्म साबुन वाले पानी से धोएं और हवा में सुखाएं। बैक्टीरिया बढ़ने से बचाव के लिए नियमित सफाई जरूरी है।
उपचार के दौरान बच्चे को 5 से 15 मिनट तक शांत रखें। बच्चे को मास्क लगाकर धीरे-धीरे गहरी सांस लेने के लिए प्रोत्साहित करें। अगर बच्चा बहुत छोटा है तो उसे गोद में सीधा रखकर मास्क लगाएं। बच्चे को सोते समय नेबुलाइजर न दें अगर इससे वह जाग जाए। बच्चे को शांत करने के लिए खिलौने या कहानी का इस्तेमाल करें लेकिन उपचार के दौरान शोर कम रखें। मशीन को तौलिए पर रखकर कंपन कम करें।
नेबुलाइजर उपकरण को साफ रखना और सही तरीके से असेंबल करना महत्वपूर्ण है। मास्क या माउथपीस को बच्चे की उम्र के अनुसार चुनें। 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए मास्क जरूरी है। उपचार के बाद बच्चे की सांस पर नजर रखें। अगर सांस और खराब हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। नेबुलाइजर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें और ओवरयूज से बचें।
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