Budget 2026 में नया आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल से लागू, करदाताओं के अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष फोकस

वित्त मंत्री ने Budget भाषण में कहा कि जुलाई 2024 में 1961 के आयकर अधिनियम की व्यापक समीक्षा की घोषणा की गई थी, जिसे रिकॉर्ड समय में पूरा कर आयकर अधिनियम 2025 तैयार किया ग

Feb 1, 2026 - 15:15
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Budget 2026 में नया आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल से लागू, करदाताओं के अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष फोकस
Budget 2026 में नया आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल से लागू, करदाताओं के अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष फोकस

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए गए यूनियन Budget 2026-27 में आयकर प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है। जुलाई 2024 में घोषित 1961 के आयकर अधिनियम की समीक्षा को रिकॉर्ड समय में पूरा कर नया आयकर अधिनियम 2025 तैयार किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इस नए कानून से करदाताओं के अनुपालन को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें नियमों और फॉर्मों को सरल बनाना, फाइलिंग प्रक्रियाओं में सुधार और छोटे करदाताओं के लिए राहत शामिल है। कर स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अनुपालन आसान बनाने और कुछ प्रक्रियाओं में छूट देने के कई उपाय किए गए हैं।

वित्त मंत्री ने Budget भाषण में कहा कि जुलाई 2024 में 1961 के आयकर अधिनियम की व्यापक समीक्षा की घोषणा की गई थी, जिसे रिकॉर्ड समय में पूरा कर आयकर अधिनियम 2025 तैयार किया गया है। यह नया अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। नए कानून से कर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जिसमें टेक्स्ट वॉल्यूम को लगभग 50 प्रतिशत कम किया गया है और धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है। अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 की गई है। पुराने कानून में अस्सेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर के बीच अंतर को समाप्त कर एकल 'टैक्स ईयर' फ्रेमवर्क लागू किया गया है। सरलीकृत आयकर नियम और फॉर्म जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे, जिससे करदाताओं को नए प्रावधानों से परिचित होने का पर्याप्त समय मिलेगा। फॉर्मों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य नागरिक बिना कठिनाई के अनुपालन कर सकें। यह बदलाव ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देगा और करदाताओं के लिए अनुपालन को आसान बनाएगा।

करदाताओं के लिए कई राहत उपाय, रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ी, टीडीएस और टीसीएस दरों में संशोधन

Budget में करदाताओं के कई दर्द बिंदुओं को दूर करने के उपाय किए गए हैं। रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, जिसमें नाममात्र शुल्क लागू होगा। अपडेटेड रिटर्न रीअसेसमेंट के बाद भी फाइल किए जा सकेंगे। टीडीएस दरों को रेशनलाइज किया गया है। छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमेटेड प्रक्रिया से निल या लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट मिलेगा, जो पहले विवेकाधीन आवेदन प्रक्रिया से अलग है। सीनियर सिटीजन फॉर्म 15G/15H को एनएसडीएल और सीडीएसएल के माध्यम से सीधे जमा कर सकेंगे। ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस दर 5-20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है, बिना किसी राशि सीमा के। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। अल्कोहलिक लिकर, स्क्रैप और कुछ मिनरल्स पर टीसीएस दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए ब्याज पर इनकम टैक्स छूट दी गई है और टीडीएस समाप्त किया गया है। अपील में प्री-डिपॉजिट 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत (कोर टैक्स डिमांड पर) कर दिया गया है। ये उपाय करदाताओं की नकदी प्रवाह में सुधार लाएंगे और अनुपालन को आसान बनाएंगे।

नए आयकर अधिनियम में एमएटी क्रेडिट और अन्य बदलाव, 1 अप्रैल 2026 से एमएटी फाइनल टैक्स 14% पर, पुराना क्रेडिट सेट-ऑफ जारी

नए आयकर अधिनियम 2025 में मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (एमएटी) को फाइनल टैक्स बनाने का प्रावधान है। 1 अप्रैल 2026 से एमएटी दर 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत कर दी गई है। 31 मार्च 2026 तक जमा पुराना एमएटी क्रेडिट सेट-ऑफ के लिए उपलब्ध रहेगा। नए कानून में करदाताओं के लिए अनुपालन सरल बनाने पर जोर है। फॉर्मों को रीडिजाइन किया गया है ताकि सामान्य नागरिक आसानी से अनुपालन कर सकें। Budget में आयकर स्लैब और दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई टैक्स व्यवस्था में बेसिक एक्जेम्प्शन 4 लाख रुपये तक है, उसके बाद स्लैब 5 प्रतिशत से शुरू होकर 30 प्रतिशत तक जाते हैं। पुरानी व्यवस्था में भी कोई बदलाव नहीं है। नए अधिनियम में बदलावों को शामिल किया जाएगा। यह कानून राजस्व न्यूट्रल है और व्याख्या संबंधी विवादों को कम करने पर केंद्रित है। करदाताओं को नए प्रावधानों से परिचित होने का समय दिया जाएगा।

नया आयकर अधिनियम 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू होने से कर प्रणाली में सरलता और पारदर्शिता आएगी। Budget में करदाताओं के अनुपालन को आसान बनाने और छोटे करदाताओं को राहत देने पर फोकस किया गया है।

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