2025 में 54 बाघों ने तोड़ा दम, एक हफ्ते में 6 मौतें, टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का सिलसिला जारी, वन विभाग अलर्ट। 

भारत का टाइगर स्टेट कहलाने वाला मध्य प्रदेश 2025 में बाघों की मौतों के मामले में चिंताजनक स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में इस साल अब तक

Dec 17, 2025 - 11:37
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2025 में 54 बाघों ने तोड़ा दम, एक हफ्ते में 6 मौतें, टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का सिलसिला जारी, वन विभाग अलर्ट। 
2025 में 54 बाघों ने तोड़ा दम, एक हफ्ते में 6 मौतें, टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का सिलसिला जारी, वन विभाग अलर्ट। 

भारत का टाइगर स्टेट कहलाने वाला मध्य प्रदेश 2025 में बाघों की मौतों के मामले में चिंताजनक स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में इस साल अब तक 54 बाघों की मौत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने के बाद से किसी एक साल में सबसे ज्यादा है। पिछले वर्षों की तुलना में यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 2021 में 34 मौतें हुई थीं, 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 मौतें दर्ज की गई थीं। 2025 में साल पूरा होने से पहले ही यह संख्या 54 तक पहुंच गई है। विशेष रूप से दिसंबर महीने में मौतों का सिलसिला तेज हुआ है। पिछले एक हफ्ते में ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में 6 बाघों की मौत हुई है। इनमें से एक मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई जहां एक बाघ का शव मिला। यह शव संदिग्ध परिस्थितियों में पावर लाइन के पास पाया गया और इलेक्ट्रोक्यूशन की आशंका जताई जा रही है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख संरक्षण क्षेत्रों में से एक है जहां बाघों की अच्छी आबादी है। यहां शनिवार को ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के दौरान सर्वे करने वाली टीम को बाघ का शव मिला। यह मौत उमरिया जिले के चंदिया वन रेंज में हुई। इसके अलावा हाल के दिनों में संजय टाइगर रिजर्व में दो शावकों की मौत हुई, बालाघाट जिले में एक बाघिन का शव मिला और रतापानी क्षेत्र में दो बाघों की मौत दर्ज की गई। इन मौतों से राज्य में बाघ संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। एक हफ्ते में छह मौतें और सालाना आंकड़ा 54 तक पहुंचना प्रोजेक्ट टाइगर के इतिहास में पहली बार है।

मध्य प्रदेश में बाघों की आबादी सबसे ज्यादा है। 2022 की टाइगर सेंसस के अनुसार राज्य में 785 बाघ थे जो देश में सबसे अधिक है। बाघों की बढ़ती संख्या के साथ मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। इन मौतों में प्राकृतिक कारण जैसे क्षेत्रीय लड़ाई शामिल हैं लेकिन कुछ मामलों में अप्राकृतिक कारण जैसे इलेक्ट्रोक्यूशन की आशंका भी सामने आ रही है। हाल की मौतों में से कई संदिग्ध हैं जहां जांच चल रही है। वन विभाग हर मौत की जांच करता है और शुरुआत में इसे शिकार का मामला मानकर कार्रवाई शुरू करता है। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच के बाद कारण स्पष्ट होते हैं। राज्य के विभिन्न टाइगर रिजर्व जैसे बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा, संजय और पन्ना में बाघों की निगरानी की जाती है। इन क्षेत्रों में पैट्रोलिंग और सर्विलांस बढ़ाया गया है। हाल की मौतों के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने सभी फील्ड ऑफिसर्स को निर्देश जारी किए हैं कि वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दें। बढ़ती मौतों को देखते हुए जांच और सुरक्षा उपायों पर जोर दिया जा रहा है। बांधवगढ़ में मिला शव सर्वे के दौरान पाया गया जो ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन का हिस्सा था। इस सर्वे में बाघों की गिनती और उनके आवास की स्थिति का आकलन किया जाता है।

2025 की मौतों में से कई रिजर्व के अंदर और बाहर हुई हैं। राज्य में बाघों की घनी आबादी होने के कारण क्षेत्रीय झगड़ों में मौतें आम हैं लेकिन हाल की घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हुई हैं। दिसंबर में हुई मौतें संजय टाइगर रिजर्व, बालाघाट, रतापानी और बांधवगढ़ जैसे क्षेत्रों में दर्ज की गईं। इनमें शावक और वयस्क बाघ दोनों शामिल हैं। एक हफ्ते में इतनी मौतें होने से जांच तेज कर दी गई है। वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर शवों की जांच की और सैंपल लिए। मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है क्योंकि यहां बाघों की संख्या अन्य राज्यों से ज्यादा है। लेकिन मौतों का बढ़ता आंकड़ा संरक्षण प्रयासों के लिए चुनौती बन रहा है। पिछले सालों में मौतें 40 के आसपास रहती थीं लेकिन 2025 में यह 54 तक पहुंच गई। दिसंबर के मध्य में ही आंकड़ा 53 था और बांधवगढ़ की मौत के साथ 54 हो गया। यह मौतें विभिन्न कारणों से हुई हैं जिनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी। राज्य में बाघ संरक्षण के लिए विशेष टीमें काम कर रही हैं। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो जैसी एजेंसियां सक्रिय हैं। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के एक मामले में गिरफ्तारी भी हुई लेकिन मौतों का सीधा संबंध उससे नहीं है। मौतों की जांच में एनटीसीए के प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। हर मौत को शुरुआत में शिकार मानकर जांच शुरू होती है।

इस साल की मौतें राज्य के विभिन्न जिलों और रिजर्व में फैली हुई हैं। बालाघाट, उमरिया, सिद्धि जैसे क्षेत्रों में मामले सामने आए हैं। रतापानी क्षेत्र जो संभावित टाइगर रिजर्व है वहां भी मौतें हुईं। इन घटनाओं से बाघों के आवास और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित हो रहा है। वन विभाग ने सभी रेंज ऑफिसर्स को अलर्ट जारी किया है। मध्य प्रदेश में बाघों की मौतों का यह आंकड़ा प्रोजेक्ट टाइगर के 50 से अधिक वर्षों के इतिहास में सबसे ज्यादा है। साल अभी पूरा नहीं हुआ है और दिसंबर में ही कई मौतें दर्ज हुईं। एक हफ्ते में छह मौतें इस सिलसिले की गंभीरता दिखाती हैं। बांधवगढ़ जैसा प्रमुख रिजर्व भी इससे अछूता नहीं रहा। जांच पूरी होने पर कारणों का पता चलेगा लेकिन फिलहाल आंकड़ा 54 पर पहुंच चुका है। यह स्थिति राज्य में बाघ संरक्षण की मौजूदा चुनौतियों को उजागर करती है। बढ़ती आबादी के साथ मौतें भी बढ़ रही हैं। पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो 2025 सबसे खराब साल साबित हो रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं लेकिन मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा।

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