भारतीय महिला अंधे क्रिकेट टीम ने पहला टी-20 विश्व कप जीता, नेपाल को 7 विकेट से हराकर रचा इतिहास
यह टूर्नामेंट 11 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में शुरू हुआ था और इसमें छह देशों की टीमें शामिल हुईं - भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका। लीग
कोलंबो। भारतीय महिला अंधे क्रिकेट टीम ने रविवार को कोलंबो के सरावनमुट्टू स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में नेपाल को 7 विकेट से हराकर पहला महिला अंधे टी-20 विश्व कप 2025 जीत लिया। यह जीत भारत के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह पहली बार है जब महिला अंधे क्रिकेट का टी-20 विश्व कप आयोजित हुआ। कप्तान टीसी दीपिका की अगुवाई में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से धूल चटाने के बाद फाइनल में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। नेपाल ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 119 रन बनाए, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने उन्हें रोक लिया। फिर बल्लेबाजी में भारत ने 14.3 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट के लिए दोहरा सम्मान है, क्योंकि महज तीन सप्ताह पहले नवीन मुंबई में साउथ अफ्रीका को हराकर सामान्य दृष्टि वाली भारतीय महिला टीम ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 जीता था।
यह टूर्नामेंट 11 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में शुरू हुआ था और इसमें छह देशों की टीमें शामिल हुईं - भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका। लीग चरण का आयोजन दिल्ली और बेंगलुरु में हुआ, जबकि नॉकआउट मुकाबले श्रीलंका के कोलंबो में खेले गए। यह पहला मौका था जब महिला अंधे क्रिकेट को टी-20 विश्व कप का दर्जा मिला। वर्ल्ड ब्लाइंड क्रिकेट काउंसिल (डब्ल्यूबीसीसी) के तहत पुरुष अंधे क्रिकेट का टी-20 विश्व कप 2012 से हो रहा है, लेकिन महिलाओं के लिए यह नया अध्याय था। अंधे क्रिकेट में खिलाड़ियों को दृष्टि के आधार पर बी1, बी2 और बी3 श्रेणियों में बांटा जाता है। बी1 पूरी तरह अंधे, बी2 आंशिक दृष्टि वाले और बी3 कम दृष्टि वाले होते हैं। गेंद प्लास्टिक की होती है जिसमें धातु की गेंदें भरी जाती हैं, जो खनखनाहट से आवाज करती हैं। हर टीम में तीनों श्रेणियों के खिलाड़ी होने जरूरी हैं।
भारतीय टीम ने लीग चरण में सभी पांच मैच जीते। उन्होंने पाकिस्तान को 148 रनों से, श्रीलंका को 209 रनों से, अमेरिका को भारी अंतर से और अन्य मैचों में भी दबदबा बनाए रखा। पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर रहते हुए वे सीधे सेमीफाइनल में पहुंचीं। नेपाल ने भी मजबूत प्रदर्शन किया और दूसरे स्थान पर रही। सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। बारिश से गीली पिच पर ऑस्ट्रेलिया 20 ओवर में 111 रन ही बना सकी। बी3 श्रेणी की जूली न्यूमैन ने 25 रन, चनाकन बुआखाओ ने 34 और कोर्टनी लुईस ने 14 रन बनाए। कप्तान दीपिका ने महत्वपूर्ण रनआउट किया, जिससे मैच का रुख बदल गया। भारतीय गेंदबाजों ने कसी हुई लाइन रखी। जवाब में भारत ने 13.2 ओवर में 112 रन का लक्ष्य 1 विकेट खोकर हासिल कर लिया। बी3 की गंगा कदम ने 41 रन (31 गेंद), बी2 की बसंती हंसदा ने 45 रन (39 गेंद) और बी1 की करुणा ने नाबाद 16 रन (5 गेंद) बनाए। बसंती को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
दूसरे सेमीफाइनल में नेपाल ने पाकिस्तान को 7 विकेट से हराया। पाकिस्तान ने 20 ओवर में 169 रन बनाए, लेकिन नेपाल ने लक्ष्य 18 ओवर में हासिल कर लिया। नेपाल की बीनीता पुन ने 46 रन (23 गेंद) बनाए, लेकिन हिट विकेट आउट हो गईं। सुस्मा तामांग 36 रन नाबाद रहीं। पाकिस्तान की शुमैला किरण ने 1-10 से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की। यह जीत नेपाल के लिए भी खास थी, क्योंकि वे पहली बार फाइनल में पहुंचीं। फाइनल 23 नवंबर को सरावनमुट्टू स्टेडियम में खेला गया, जो श्रीलंका का सबसे पुराना टेस्ट मैदान है। नेपाल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। उन्होंने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 119 रन बनाए। सुस्मा तामांग ने फिर 36 रन की उपयोगी पारी खेली। भारतीय गेंदबाजों ने अच्छी पकड़ बनाए रखी। कप्तान दीपिका ने कहा कि हमने रणनीति के तहत गेंदबाजी की और विकेट लेने पर फोकस किया।
भारत को 120 रन का लक्ष्य मिला। उन्होंने 14.3 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। ओपनर बसंती हंसदा ने 32 रन और गंगा कदम ने 28 रन बनाए। मध्यक्रम में निशा रानी ने 25 रन जोड़े। भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामकता दिखाई और नेपाल के गेंदबाजों को दबाव में ला दिया। कप्तान दीपिका ने नाबाद 18 रन बनाकर टीम को फिनिश लाइन पर पहुंचाया। उन्होंने मैच के बाद कहा कि यह हमारी पूरी टीम का प्रयास है। हमने कड़ी मेहनत की और कभी हारे नहीं। यह खिताब उन सभी लड़कियों को समर्पित है जो कठिनाइयों के बावजूद खेल रही हैं। नेपाल की कप्तान सुस्मा तामांग ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि भारत मजबूत टीम थी। हमने अच्छा लड़ा, लेकिन वे बेहतर साबित हुए।
यह टूर्नामेंट समर्थनम नामक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा आयोजित किया गया, जो विकलांगों के लिए काम करता है। भारतीय टीम का चयन भोपाल ट्रायल्स से हुआ था। कई खिलाड़ी ग्रामीण इलाकों से हैं। बसंती हंसदा ओडिशा से हैं, जिन्होंने स्कूल के बाद दिल्ली कैंप में क्रिकेट सीखा। दीपिका टीसी ने 2023 में नेपाल द्विपक्षीय सीरीज में पहली भारतीय महिला अंधे टीम का नेतृत्व किया था। आईबीएसए वर्ल्ड गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। निशा रानी और अन्य खिलाड़ी शिक्षिका बनने का सपना देखती हैं। इस जीत से उन्हें नई प्रेरणा मिली। समर्थनम के प्रमुख ने कहा कि यह विकलांग महिलाओं के लिए बड़ा कदम है। हमने 500,000 से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और महिला क्रिकेटरों ने बधाई दी। हरमनप्रीत कौर ने कहा कि यह दोहरा विश्व कप महीना है। शेफाली वर्मा और जेमिमाह रॉड्रिग्स ने प्रोत्साहन दिया। पुरुष टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने भी शुभकामनाएं दीं। यह जीत महिला क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ाएगी। सामान्य महिला विश्व कप फाइनल को 185 मिलियन ने स्ट्रीम किया, 92 मिलियन ने टीवी पर देखा। अंधे क्रिकेट को भी अब ज्यादा ध्यान मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खेल को वैश्विक स्तर पर ले जाएगा। डब्ल्यूबीसीसी ने कहा कि महिलाओं का प्रवेश सकारात्मक है। भविष्य में ज्यादा देश हिस्सा लेंगे।
यह खिताब भारत की बदलती खेल संस्कृति दिखाता है। विकलांग खिलाड़ी अब मुख्यधारा में आ रहे हैं। ओडिशा की सुश्मा ने नेपाल सीरीज में डेब्यू किया। वे शिक्षिका बनना चाहती हैं। दीपिका ने कहा कि यह हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा पल है। हमने दृष्टि न होने के बावजूद सपने देखे। टूर्नामेंट ने दिखाया कि क्रिकेट सबका है। ग्रामीण लड़कियां अब कैंप जॉइन कर रही हैं। कोचों को कॉल्स आ रहे हैं। यह जीत असमानता दूर करने का संदेश है। भारत ने दो विश्व कप जीते - एक सामान्य, एक अंधे। यह महिलाओं की ताकत है।
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