भूमि पेडनेकर ने 100 लड़कियों को पछाड़कर हासिल की थी डेब्यू फिल्म, ‘दम लगा के हईशा’ के गानों ने उड़ाया था धूल और बना दिया था स्टार
भूमि की इस फिल्म तक की यात्रा काफी रोचक रही। उन्होंने 18 साल की उम्र में यश राज फिल्म्स जॉइन किया था और छह साल तक कास्टिंग डिपार्टमेंट में काम किया। इस दौरान उन्होंने हजारों ए
भूमि पेडनेकर ने बॉलीवुड में अपनी शुरुआत एक ऐसी फिल्म से की जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। 2015 में रिलीज हुई ‘दम लगा के हईशा’ में उन्होंने संध्या नाम की एक ओवरवेट दुल्हन का किरदार निभाया, जो आयुष्मान खुराना के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों के दिल जीत लिया। इस रोल के लिए भूमि को 15 किलोग्राम वजन बढ़ाना पड़ा था, ताकि किरदार की सच्चाई बरकरार रहे। फिल्म के लिए ऑडिशन प्रक्रिया काफी लंबी चली, जिसमें कुल 100 से अधिक लड़कियों ने हिस्सा लिया। भूमि उस समय यश राज फिल्म्स में असिस्टेंट कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम कर रही थीं और उन्होंने खुद कई लड़कियों का ऑडिशन लिया था। निर्देशक शरत कटारिया को जब लगा कि भूमि ही इस रोल के लिए सबसे उपयुक्त हैं, तो उन्होंने उन्हें चुना। यह प्रक्रिया इतनी कठिन थी कि भूमि को कई राउंड्स से गुजरना पड़ा, लेकिन उनकी मेहनत और किरदार के प्रति समर्पण ने उन्हें यह भूमिका दिलाई। फिल्म ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि कई अवॉर्ड्स भी जीते, जिसमें भूमि को बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
भूमि की इस फिल्म तक की यात्रा काफी रोचक रही। उन्होंने 18 साल की उम्र में यश राज फिल्म्स जॉइन किया था और छह साल तक कास्टिंग डिपार्टमेंट में काम किया। इस दौरान उन्होंने हजारों एक्टर्स का ऑडिशन लिया, जिसमें कई बड़े नाम भी शामिल थे। जब ‘दम लगा के हईशा’ की स्क्रिप्ट आई, तो कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने उन्हें सलाह दी कि वे खुद ट्राई करें। शुरू में भूमि को लगा कि यह सिर्फ मॉक ऑडिशन है, लेकिन बाद में पता चला कि यह असली ऑडिशन था। उन्होंने अन्य लड़कियों का ऑडिशन लेते हुए खुद को भी फेयरनेस के सवालों से जूझते हुए पाया, क्योंकि वे जानती थीं कि उन्हें भी इस रोल के लिए कंसिडर किया जा रहा है। अंत में निर्देशक ने उन्हें चुना, क्योंकि उनका लुक, परफॉर्मेंस और किरदार के साथ जुड़ाव बाकियों से अलग था। भूमि ने रोल के लिए वजन बढ़ाने के साथ-साथ हरिद्वार की लोकल भाषा और संस्कृति को समझने में भी समय लगाया, ताकि किरदार प्रामाणिक लगे।
फिल्म की कहानी 90 के दशक की पृष्ठभूमि में सेट थी, जहां प्रेम विवाह की बजाय अरेंज्ड मैरिज की परंपरा दिखाई गई। भूमि का किरदार संध्या एक पढ़ी-लिखी लेकिन बॉडी शेमिंग का शिकार लड़की थी, जो पति के साथ रिश्ता बनाने की कोशिश करती है। फिल्म के गाने, खासकर ‘सुन रुबिया सुन रुबिया’ और ‘मोह मोह के धागे’ ने जमकर धूम मचाई। इन गानों की धुन और लिरिक्स ने दर्शकों को इतना आकर्षित किया कि वे आज भी लोकप्रिय हैं। गाने फिल्म के इमोशनल कोर को मजबूत करते थे और भूमि की परफॉर्मेंस को हाइलाइट करते थे। फिल्म की शूटिंग सिर्फ 40 दिनों में पूरी हुई, लेकिन इसकी क्वालिटी और कहानी ने इसे यादगार बना दिया। फिल्म ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी जीता और कई अन्य सम्मानों से नवाजी गई। भूमि की डेब्यू परफॉर्मेंस को क्रिटिक्स ने खूब सराहा और इसे हाल के वर्षों के बेस्ट डेब्यू में से एक माना गया।
भूमि ने इस रोल के लिए खुद को पूरी तरह बदल लिया। वजन बढ़ाने की प्रक्रिया में उन्होंने डाइट और लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव किए। फिल्म रिलीज होने के बाद जब बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर चर्चा हुई, तो भूमि ने इसे पॉजिटिव तरीके से उठाया और कहा कि हर बॉडी ब्यूटीफुल है। उनकी इस फिल्म ने बॉलीवुड में कन्वेंशनल हीरोइन इमेज को चैलेंज किया और दिखाया कि टैलेंट लुक से ज्यादा महत्वपूर्ण है। फिल्म की सफलता ने भूमि को स्टारडम की पहली सीढ़ी दी और उन्हें आगे की फिल्मों के लिए दरवाजे खोल दिए। आयुष्मान खुराना के साथ उनकी केमिस्ट्री ने दर्शकों को छुआ और फिल्म को कल्ट स्टेटस मिला। आज भी जब फिल्म की बात होती है, तो गानों और भूमि के ट्रांसफॉर्मेशन की चर्चा होती है।
फिल्म की सफलता के बाद भूमि ने विविध भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उनकी शुरुआत हमेशा याद की जाती है। ‘दम लगा के हईशा’ ने उन्हें एक मजबूत आधार दिया और दिखाया कि मेहनत और साहस से कोई भी सपना हासिल किया जा सकता है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और क्रिटिकल सक्सेस भी हासिल की। भूमि की कहानी प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी बैकग्राउंड के, सिर्फ टैलेंट के दम पर जगह बनाई। ऑडिशन प्रक्रिया में 100 लड़कियों में से चुने जाने ने उनकी जीत को और खास बना दिया। फिल्म के गाने आज भी प्लेलिस्ट में जगह बनाए हुए हैं और नए दर्शकों को आकर्षित करते हैं।
भूमि का यह डेब्यू सिर्फ एक फिल्म नहीं था, बल्कि एक मूवमेंट की शुरुआत थी। उन्होंने बॉडी पॉजिटिविटी और रियलिस्टिक किरदारों को बढ़ावा दिया। फिल्म ने 90 के दशक की नॉस्टैल्जिया को जीवंत किया और छोटे शहरों की कहानियों को मुख्यधारा में लाया। भूमि ने बाद में कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी पहली फिल्म का जादू अलग रहा। गानों की हिटनेस ने फिल्म को और पॉपुलर बनाया और भूमि को स्टार बना दिया। आज 11 साल बाद भी लोग इस फिल्म को याद करते हैं और भूमि के ट्रांसफॉर्मेशन की तारीफ करते हैं।
What's Your Reaction?







