पंजाब में कृषि की नई क्रांति: बिना मिट्टी और 90% कम पानी में लहलहाएंगी फसलें, गुरदासपुर से शुरू हुआ 'गुरु नानक खेती' का आधुनिक मॉडल।

पंजाब के गुरदासपुर जिले के जैनपुर गांव से एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक कृषि पहल की शुरुआत की गई है, जिसे 'गुरु नानक खेती' नाम दिया

Mar 18, 2026 - 11:22
 0  6
पंजाब में कृषि की नई क्रांति: बिना मिट्टी और 90% कम पानी में लहलहाएंगी फसलें, गुरदासपुर से शुरू हुआ 'गुरु नानक खेती' का आधुनिक मॉडल।
पंजाब में कृषि की नई क्रांति: बिना मिट्टी और 90% कम पानी में लहलहाएंगी फसलें, गुरदासपुर से शुरू हुआ 'गुरु नानक खेती' का आधुनिक मॉडल।
  • गिरते भू-जल संकट का समाधान बनी हाइड्रोपोनिक्स तकनीक; पंजाब सरकार ने बागवानी और स्मार्ट फार्मिंग के लिए रू.1,300 करोड़ का मेगा प्लान किया पेश।
  • मिट्टी की जगह पानी और पोषक तत्वों का खेल; पंजाब के किसान अब 'वर्टिकल फार्मिंग' से कमाएंगे पांच गुना मुनाफा, टिकाऊ खेती के नए युग का आगाज़।

पंजाब के गुरदासपुर जिले के जैनपुर गांव से एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक कृषि पहल की शुरुआत की गई है, जिसे 'गुरु नानक खेती' नाम दिया गया है। यह प्रोजेक्ट मुंबई के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा और अकाल पुरख की फौज द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया है। इस परियोजना का मूल विचार हाल ही में आई बाढ़ के दौरान प्रभावित हुए किसानों की मदद करते समय उपजा था। विशेषज्ञों ने महसूस किया कि केवल एक बार की आर्थिक मदद से किसानों का भविष्य नहीं सुधर सकता, बल्कि उन्हें ऐसी तकनीक से जोड़ना होगा जो कम लागत में टिकाऊ मुनाफा दे सके। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को हाइड्रोपोनिक्स, इंटरक्रॉपिंग (सह-फसल) और पानी की बचत करने वाली आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  • हाइड्रोपोनिक्स तकनीक: भविष्य की खेती का आधार

हाइड्रोपोनिक्स एक ऐसी तकनीक है जिसमें पौधों को उगाने के लिए मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती। इसमें पौधों की जड़ों को खनिज तत्वों से भरपूर पानी के घोल में रखा जाता है। पंजाब जैसे राज्य के लिए यह तकनीक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां धान की खेती के कारण भू-जल का स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। हाइड्रोपोनिक्स प्रणाली में पानी का पुनर्चक्रण (Recycling) होता है, जिससे पारंपरिक खेती के मुकाबले लगभग 90 प्रतिशत पानी की बचत होती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने भी इस दिशा में 'हाइब्रिड हाइड्रोपोनिक्स टेक्नोलॉजी' विकसित की है, जिसे पेटेंट भी मिल चुका है। यह तकनीक न केवल पानी बचाती है, बल्कि कीटनाशकों के उपयोग को भी न्यूनतम कर देती है।

  • खेती का नया ढांचा: वर्टिकली ग्रोथ

हाइड्रोपोनिक्स का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे लंबवत (Vertically) व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे कम जमीन पर अधिक पौधे उगाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, 2.5 एकड़ के हाइड्रोपोनिक्स सेटअप से उतनी ही पैदावार ली जा सकती है जितनी 10 एकड़ की पारंपरिक खेती से मिलती है।

  • बागवानी और रू.1,300 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट

पंजाब सरकार ने खेती में विविधता लाने और गेहूं-धान के चक्र से किसानों को बाहर निकालने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत आगामी 10 वर्षों में बागवानी क्षेत्र के कायाकल्प के लिए रू.1,300 करोड़ के निवेश की योजना बनाई गई है। इस प्रोजेक्ट को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) का सहयोग प्राप्त होगा। सरकार का लक्ष्य फलों, सब्जियों और फूलों की खेती के क्षेत्रफल को 300 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा कोल्ड स्टोरेज, आधुनिक मंडियों और प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना पर खर्च किया जाएगा ताकि किसान अपनी उपज को सीधे बाजार में बेहतर दामों पर बेच सकें और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

  • जलवायु अनुकूल कृषि और जल संरक्षण

बदलते मौसम और बेमौसम बारिश ने पंजाब के किसानों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार 'क्लाइमेट रेजिलिएंट' यानी जलवायु अनुकूल खेती पर जोर दे रही है। पंजाब के बजट 2026-27 में कृषि क्षेत्र के लिए रू.15,377 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) तकनीक को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड आवंटित किया गया है, जो धान की रोपाई के पारंपरिक तरीके के मुकाबले बहुत कम पानी की खपत करता है। इसके अलावा, पंजाब के पोठोहार क्षेत्र में रू.7 बिलियन का 'एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन प्लान' भी लॉन्च किया गया है, जिसमें सोलर पंप और मिनी बांधों के निर्माण के लिए 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है।

स्मार्ट फार्मिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रवेश

पंजाब की खेती अब केवल हल और ट्रैक्टर तक सीमित नहीं रही है। नए प्रोजेक्ट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और सेंसर आधारित सिंचाई प्रणालियों को शामिल किया जा रहा है। हाइड्रोपोनिक्स फार्म्स में सेंसर के जरिए पानी के पीएच (pH) मान और पोषक तत्वों की मात्रा की रीयल-टाइम निगरानी की जाती है। इससे खाद और उर्वरकों की बर्बादी रुकती है। स्मार्ट फर्टिगेशन सिस्टम के जरिए पौधों को केवल उतनी ही खुराक दी जाती है जितनी उन्हें आवश्यकता होती है। यह तकनीक न केवल लागत कम करती है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाती है, जिससे निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं। हाइड्रोपोनिक्स और टिकाऊ खेती अपनाने वाले पंजाब के प्रगतिशील किसान पारंपरिक खेती के मुकाबले पांच गुना तक अधिक कमाई कर रहे हैं। विशेष रूप से विदेशी सब्जियां जैसे लेट्यूस, चेरी टमाटर, बीज रहित खीरे और स्ट्रॉबेरी की मांग बड़े शहरों के प्रीमियम रिटेल स्टोर्स में बहुत अधिक है। पंजाब का उत्कृष्ट सड़क और हवाई संपर्क इन उच्च-मूल्य वाली फसलों के निर्यात में सहायक सिद्ध हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंजाब के छोटे और सीमांत किसान सहकारी समूहों (Cooperatives) के माध्यम से हाइड्रोपोनिक्स को अपनाते हैं, तो उनकी आय में आमूलचूल परिवर्तन आ सकता है। सरकार नर्सरी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए भी प्रशिक्षण केंद्र खोल रही है।

Also Read- ये बीज देते हैं जबरदस्त फायदे, रोजाना सेवन से मिलती है ऊर्जा, मसल्स स्ट्रेंथ और कई बीमारियों से सुरक्षा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow