उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में 30 हजार महिला किसान कर रही हैं रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर क्रांति।

बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले की करीब 30 हजार महिला किसानों की प्रेरणादायक

Feb 24, 2026 - 13:57
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उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में 30 हजार महिला किसान कर रही हैं रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर क्रांति।
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में 30 हजार महिला किसान कर रही हैं रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर क्रांति।
  • आनंद महिंद्रा ने एक्स पर शेयर की प्रेरणादायक पोस्ट, महिलाएं 1 लाख से ज्यादा लोगों को पौष्टिक सब्जियां पहुंचा रही हैं
  • Naandi फाउंडेशन के साथ मिलकर महिलाएं बनीं आत्मविश्वासी किसान और उद्यमी, मिट्टी की सेहत और पोषण पर फोकस

बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले की करीब 30 हजार महिला किसानों की प्रेरणादायक कहानी साझा की है, जो चुपचाप एक बड़ी कृषि क्रांति को जन्म दे रही हैं। आनंद महिंद्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि ये महिलाएं पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर अपना रही हैं, जिससे मिट्टी की सेहत सुधर रही है, उत्पादकता बढ़ रही है और पौष्टिक सब्जियां उत्पादित हो रही हैं। इन महिलाओं की मेहनत से रोजाना 1 लाख से ज्यादा लोगों तक विविध और पौष्टिक सब्जियां पहुंच रही हैं, जो खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह पहल Naandi फाउंडेशन के साथ शुरू हुई थी, जहां प्रशिक्षण और इनपुट्स से शुरुआत हुई और अब महिलाएं आत्मविश्वासी खाद्य उत्पादक और उद्यमी बन गई हैं। आनंद महिंद्रा ने इसे अपनी #MondayMotivation बताया और Naandi टीम को बधाई दी, खासकर मनोज, अनुपमा और आस्था सिंह को, जिन्होंने ग्राउंड लेवल पर इस बदलाव को लीड किया।

रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर एक ऐसी खेती पद्धति है जो मिट्टी की सेहत को बहाल करने, जैव विविधता बढ़ाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन बढ़ाने पर फोकस करती है। श्रावस्ती में ये महिलाएं पारंपरिक रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खाद, कंपोस्ट, क्रॉप रोटेशन, कवर क्रॉपिंग और न्यूनतम जुताई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे मिट्टी में कार्बन बढ़ रहा है, पानी की बचत हो रही है और सब्जियां ज्यादा पौष्टिक बन रही हैं। महिलाओं ने अपने घरेलू प्लॉट्स पर 'गुड फूड कॉर्नर्स' विकसित किए हैं, जहां मौसमी सब्जियां और हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इस बदलाव से न केवल परिवार की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हुई है बल्कि अतिरिक्त उत्पादन बाजार में बेचकर आय भी बढ़ी है। Naandi फाउंडेशन ने 2023 में Women's Empowerment through Regenerative Agriculture (WERA) प्रोग्राम शुरू किया, जो श्रावस्ती सहित कई जिलों में चल रहा है। श्रावस्ती में यह पहल महिंद्रा ग्रुप के CSR सपोर्ट से संभव हुई है।

श्रावस्ती जिले के हरिहरपुर रानी गांव में हाल ही में एक फूड फेस्टिवल आयोजित किया गया, जहां कई सफल सीजन मनाए गए। फेस्टिवल में महिलाओं को अवॉर्ड दिए गए, लेकिन असली आकर्षण टेस्टिंग टेबल था, जहां ताजी गाजर, चुकंदर, पुदीना चटनी और अन्य सब्जियां परोसी गईं। ये सब्जियां रीजेनरेटिव तरीके से उगाई गई थीं, जिनका स्वाद और पोषण स्तर पारंपरिक से बेहतर था। फेस्टिवल ने महिलाओं की मेहनत को सेलिब्रेट किया और दिखाया कि मिट्टी का सम्मान करने से पोषण और आजीविका दोनों फलते-फूलते हैं। महिलाओं ने ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र प्राप्त किए और अब वे अपने गांवों में अन्य महिलाओं को भी सिखा रही हैं। इस प्रक्रिया में बीज, इनपुट्स, लोकल भाषा में मैनुअल और एग्रीकल्चर अल्मनैक प्रदान किए गए। परिणामस्वरूप, महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं और परिवार की पोषण जरूरतें पूरी कर रही हैं।

यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पहले से ही ज्यादा है लेकिन निर्णय लेने की भूमिका कम रही है। श्रावस्ती में रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर ने महिलाओं को केंद्र में लाकर उन्हें उत्पादक, उद्यमी और लीडर बनाया है। Naandi फाउंडेशन ने रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर हब स्थापित किए, जहां ट्रेनिंग दी जाती है और कंपोस्ट, बायो-इनपुट्स का उत्पादन होता है। प्रोग्राम ने FY22 में 3500 और FY23 में 15500 महिलाओं को ट्रेन किया, और अब संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है, उत्पादकता में सुधार हुआ है और परिवारों की आय में वृद्धि हुई है। महिलाएं अब बाजार में अपनी सब्जियां बेच रही हैं, जिससे आर्थिक स्वतंत्रता मिली है। यह बदलाव ग्रामीण भारत में खाद्य प्रणाली को मजबूत कर रहा है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लचीलापन बढ़ा रहा है।

आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उन्होंने लिखा कि ये महिलाएं चुपचाप खाद्य सुरक्षा की स्क्रिप्ट फिर से लिख रही हैं और उनका उत्साह प्रेरणादायक है। पोस्ट में फेस्टिवल की तस्वीरें और सब्जियों की झलकियां शामिल थीं, जो दिखाती हैं कि मिट्टी का सम्मान करने से कितना बड़ा बदलाव आ सकता है। महिंद्रा ग्रुप ने Naandi फाउंडेशन के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया है, जो महिलाओं को रीजेनरेटिव प्रैक्टिस सिखाने पर फोकस करता है। इस पहल से न केवल पोषण सुरक्षा बढ़ी है बल्कि महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पुरुष प्रवास करते हैं, महिलाएं खेती संभाल रही हैं और अब वे नई तकनीकों से आगे बढ़ रही हैं। यह क्रांति अन्य जिलों के लिए मॉडल बन सकती है।

श्रावस्ती की ये महिलाएं अब पायनियर बन गई हैं, जो नई प्रैक्टिस को उत्साह से अपना रही हैं। Naandi टीम ने ग्राउंड लेवल पर ट्रांसफॉर्मेशन लीड किया है, जहां महिलाओं को ट्रेनिंग, रिसोर्स और मार्गदर्शन दिया गया। परिणामस्वरूप, वे अब सिर्फ किसान नहीं बल्कि उद्यमी हैं, जो अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचा रही हैं। यह पहल भारत में ग्रामीण महिलाओं की क्षमता को दर्शाती है, जहां वे खेती को सस्टेनेबल और लाभदायक बना रही हैं। फेस्टिवल जैसे इवेंट्स ने उनकी मेहनत को सेलिब्रेट किया और अन्य महिलाओं को प्रेरित किया।

अंत में, श्रावस्ती की 30 हजार महिलाओं की यह कहानी दिखाती है कि छोटे बदलाव से बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर अपनाकर वे न केवल अपने परिवारों का पेट भर रही हैं बल्कि समाज को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रही हैं। आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने इस क्रांति को राष्ट्रीय मंच दिया है, जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।

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