पायलट और को-पायलट को अलग-अलग खाना क्यों दिया जाता है, सुरक्षा के लिए लिया गया अहम फैसला।
हवाई जहाज में पायलट और को-पायलट को एक जैसा खाना नहीं दिया जाता है। यह नियम कई एयरलाइंस में लागू है और इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा
- फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए पायलट्स अलग भोजन चुनते हैं, दोनों एक साथ बीमार न पड़ें
- एविएशन में पायलट-को-पायलट अलग मील लेते हैं, एक खाने से समस्या होने पर दूसरा संभाल सके विमान
हवाई जहाज में पायलट और को-पायलट को एक जैसा खाना नहीं दिया जाता है। यह नियम कई एयरलाइंस में लागू है और इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि एक ही खाने से फूड पॉइजनिंग या कोई स्वास्थ्य समस्या हो जाती है तो दोनों पायलट एक साथ प्रभावित न हों, ताकि कम से कम एक पायलट विमान को सुरक्षित रूप से उड़ा सके। यह प्रथा लंबे समय से चली आ रही है और अधिकांश एयरलाइंस के आंतरिक नियमों में शामिल है। यह नियम मुख्य रूप से फूड पॉइजनिंग के जोखिम को कम करने के लिए अपनाया गया है। फूड पॉइजनिंग में साल्मोनेला, ई. कोलाई, नोरोवायरस जैसी बीमारियां शामिल हो सकती हैं जो गंभीर लक्षण पैदा करती हैं। यदि दोनों पायलट एक ही खाने से प्रभावित हो जाएं तो विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए एयरलाइंस यह सुनिश्चित करती हैं कि पायलट और को-पायलट अलग-अलग मुख्य व्यंजन चुनें, जैसे एक चिकन ले तो दूसरा पास्ता या अन्य विकल्प।
यह नियम FAA या अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है लेकिन अधिकांश एयरलाइंस के फ्लाइट ऑपरेशंस मैनुअल में शामिल है। एयरलाइंस के अपने नियम होते हैं जो पायलटों को उड़ान से पहले और दौरान एक जैसा खाना न लेने का निर्देश देते हैं। कुछ एयरलाइंस में कैप्टन पहले चुनाव करता है और को-पायलट को वैकल्पिक विकल्प लेना पड़ता है।
फ्लाइट अटेंडेंट्स को यह जांचना होता है कि मील सही तरीके से लोड किए गए हैं और पायलटों के चुनाव के अनुसार उपलब्ध हैं। कई मामलों में पायलटों के मील अलग ट्रे से, अलग शेफ से या कभी-कभी अलग किचन से तैयार किए जाते हैं ताकि कॉमन सोर्स कंटेमिनेशन का जोखिम कम हो।
लंबी उड़ानों में यह नियम सख्ती से लागू होता है जहां क्रू मील उपलब्ध होते हैं। छोटी उड़ानों में कभी-कभी पायलट अपना खाना घर से लाते हैं लेकिन फिर भी अलग-अलग रखने की कोशिश की जाती है। पायलट कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं जैसे कच्ची मछली या मसालेदार भोजन जो पेट की समस्या पैदा कर सकते हैं।
एक उदाहरण के रूप में 1982 में बोस्टन से लिस्बन की उड़ान में टैपिओका पुदिंग से कई क्रू सदस्यों को फूड पॉइजनिंग हुई थी जिसमें पायलट और को-पायलट भी शामिल थे। ऐसे दुर्लभ मामलों के बाद यह नियम और सख्त हुआ। हालांकि फूड पॉइजनिंग से दोनों पायलट प्रभावित होने की घटनाएं बहुत कम हैं लेकिन सुरक्षा के लिए सावधानी बरती जाती है।
कुछ एयरलाइंस में कैप्टन को फर्स्ट क्लास जैसा भोजन मिलता है जबकि को-पायलट को बिजनेस क्लास स्तर का। लेकिन मुख्य फोकस अलग-अलग होना है न कि स्तर पर। यह नियम क्रू के अन्य सदस्यों पर भी लागू हो सकता है लेकिन पायलटों पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि वे विमान की नियंत्रण जिम्मेदारी संभालते हैं। पायलट उड़ान के दौरान बारी-बारी से खाते हैं ताकि एक समय पर एक पायलट नियंत्रण में रहे। खाना खाते समय भी सावधानी बरती जाती है लेकिन मुख्य नियम अलग मील का है। यह प्रथा दशकों से चली आ रही है और एविएशन इंडस्ट्री में सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
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