डॉक्टरों की सलाह: शाम को ज्यादा रोने वाला बच्चा हो सकता है इवनिंग कोलिक का शिकार, ऐसे मिलती है राहत
कोलिक के मुख्य लक्षणों में शाम के समय अचानक शुरू होने वाला तेज रोना शामिल है, जो अक्सर 6 बजे से मध्यरात्रि तक रहता है। बच्चा रोते समय गैस पास करता है या डकार आती है, लेकिन रोना
नवजात शिशुओं में शाम के समय अचानक तेज रोना शुरू हो जाना एक आम समस्या है, जिसे डॉक्टर इवनिंग कोलिक या शाम की कोलिक कहते हैं। डॉक्टर समरा मसूद के अनुसार, यदि बच्चा दिन भर सामान्य रहता है लेकिन शाम होते ही लगातार रोने लगता है, तो यह गैस या पेट की असुविधा से जुड़ी समस्या हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर 2-3 सप्ताह की उम्र से शुरू होती है और 3-4 महीने तक रह सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में बच्चा 6 महीने तक पूरी तरह ठीक हो जाता है। कोलिक में बच्चा दिन में 3 घंटे से ज्यादा, सप्ताह में 3 दिन से अधिक और लगातार 3 सप्ताह तक रोता है, जबकि अन्यथा वह स्वस्थ रहता है। शाम का समय इसलिए प्रभावित होता है क्योंकि दिन भर की थकान, हवा निगलना या पाचन तंत्र की अपरिपक्वता से गैस बनती है, जो शाम को बढ़ जाती है। बच्चे का चेहरा लाल हो जाता है, मुट्ठियां बंद हो जाती हैं, पैर पेट की ओर खींच लिए जाते हैं और रोना तेज हो जाता है। यह समस्या किसी बीमारी से नहीं जुड़ी होती, बल्कि शिशु के पाचन तंत्र के विकास से संबंधित है। माता-पिता के लिए यह समय बहुत तनावपूर्ण होता है, क्योंकि रोने वाले बच्चे को शांत करना मुश्किल लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सामान्य है और बच्चे के विकास में कोई बाधा नहीं डालता, लेकिन माता-पिता की मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
कोलिक के मुख्य लक्षणों में शाम के समय अचानक शुरू होने वाला तेज रोना शामिल है, जो अक्सर 6 बजे से मध्यरात्रि तक रहता है। बच्चा रोते समय गैस पास करता है या डकार आती है, लेकिन रोना रुकता नहीं। पेट फूला हुआ लगता है, बच्चा पीठ झुकाता है या पैरों को पेट से सटाता है। यह रोना चीख जैसा होता है और सामान्य रोने से अलग लगता है। कई बार बच्चे का चेहरा लाल हो जाता है और मुट्ठियां कस जाती हैं। यह स्थिति स्वस्थ बच्चे में होती है, जहां वजन बढ़ना, खाना और अन्य गतिविधियां सामान्य रहती हैं। शाम का समय इसलिए अधिक प्रभावित होता है क्योंकि दिन भर बच्चा विभिन्न उत्तेजनाओं से थक जाता है और पेट में जमा गैस शाम को परेशान करती है। यदि रोना 3 घंटे से ज्यादा रहता है और शांत करने के सामान्य तरीके काम नहीं करते, तो कोलिक की संभावना बढ़ जाती है। यह समस्या 10 से 40 प्रतिशत नवजातों में देखी जाती है और ज्यादातर मामलों में 3-4 महीने में खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है।
बच्चे को राहत देने का सबसे प्रभावी तरीका हर फीडिंग के बाद अच्छी तरह डकार दिलाना है। फीडिंग के दौरान बच्चा हवा निगल लेता है, जो पेट में जमा होकर गैस बनाती है। बच्चे को कंधे पर उठाकर पीठ पर हल्के थपथपाएं या बैठाकर पीठ सहलाएं, ताकि डकार आ जाए। यह काम हर फीडिंग के बाद 5-10 मिनट तक करें। यदि बच्चा बोतल से पीता है तो एंटी-कोलिक बोतल इस्तेमाल करें, जो हवा कम निगलने में मदद करती है। फीडिंग के दौरान बच्चे को सीधा रखें और ओवरफीडिंग से बचें। यदि स्तनपान करा रही हैं तो मां को गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थ जैसे गोभी, ब्रोकली या दूध उत्पादों से परहेज करने की सलाह दी जा सकती है। डकार न आने पर गैस पेट में फंस जाती है और शाम को रोना बढ़ जाता है। नियमित डकार से बच्चे को तुरंत राहत मिलती है और कोलिक के एपिसोड कम हो सकते हैं। कोलिक में बच्चे को पेट पर हल्की मालिश फायदेमंद होती है। हींग और अजवाइन की पोटली बनाकर गर्म करके पेट पर घड़ी की दिशा में धीरे-धीरे घुमाएं, लेकिन सीधे त्वचा पर न लगाएं। यह पारंपरिक उपाय गैस निकालने में मदद करता है और बच्चे को आराम देता है।
बच्चे के पेट पर हींग और अजवाइन की हल्की पोटली से मालिश एक पारंपरिक और प्रभावी उपाय है। हींग गैस को कम करने और पाचन सुधारने में मदद करती है, जबकि अजवाइन एंटी-स्पास्मोडिक गुणों से पेट की ऐंठन दूर करती है। पोटली बनाने के लिए छोटी कपड़े की थैली में हींग और अजवाइन भरें, गर्म करें और बच्चे के पेट पर घड़ी की दिशा में हल्के हाथों से घुमाएं। मालिश 5-10 मिनट तक करें, लेकिन ज्यादा दबाव न डालें। यह शाम के समय रोने से पहले करें तो बेहतर प्रभाव पड़ता है। कई माताओं को इस उपाय से बच्चे को तुरंत राहत मिलती है। हालांकि, हींग का इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में करें और डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कुछ बच्चों में एलर्जी हो सकती है। यह उपाय गैस पास करने और पेट की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में सहायक होता है।
रोजाना बच्चे को थोड़ा टमी टाइम देना कोलिक से राहत दिलाने का एक वैज्ञानिक तरीका है। बच्चे को पेट के बल लिटाकर खेलने दें, जिससे गैस बाहर निकलती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। टमी टाइम 1-2 महीने की उम्र से शुरू करें, लेकिन केवल जागते समय और निगरानी में। शुरू में 2-3 मिनट से शुरुआत करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। बच्चे के सामने खिलौने रखें ताकि वह सिर उठाने की कोशिश करे। यह व्यायाम पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और गैस जमा होने से रोकता है। टमी टाइम से बच्चे की गर्दन और कंधे भी मजबूत होते हैं। शाम के समय टमी टाइम करने से रोने के एपिसोड कम हो सकते हैं। हमेशा बच्चे को अकेला न छोड़ें और सख्त सतह पर टमी टाइम दें। यह उपाय न केवल कोलिक बल्कि बच्चे के समग्र विकास के लिए फायदेमंद है।
कोलिक से निपटने के अन्य उपायों में बच्चे को लोरियां सुनाना, हल्के से हिलाना या सफेद शोर जैसे वैक्यूम क्लीनर की आवाज चलाना शामिल है। बच्चे को स्वैडल करके लपेटना भी शांत करता है। गर्म पानी से स्नान या पेट पर गर्म सेक लगाना गैस को आराम देता है। यदि स्तनपान करा रही हैं तो मां अपनी डाइट में बदलाव करें, जैसे कैफीन या मसालेदार भोजन कम करें। बोतल फीडिंग में फॉर्मूला चेंज करने पर विचार करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह से। प्रोबायोटिक्स जैसे Lactobacillus reuteri ड्रॉप्स कुछ मामलों में रोने का समय कम करते हैं। हालांकि, कोई दवा या ड्रॉप बिना सलाह के न दें। कोलिक खुद ठीक हो जाती है, लेकिन इन उपायों से माता-पिता को राहत मिलती है। यदि रोना बहुत तेज है या बच्चा वजन नहीं बढ़ा रहा, बुखार है या उल्टी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कोलिक सामान्य है लेकिन अन्य समस्याओं जैसे रिफ्लक्स या एलर्जी से अलग करना जरूरी है। माता-पिता को खुद का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि तनाव से स्थिति और खराब हो सकती है। परिवार के सदस्यों से मदद लें और ब्रेक लें। कोलिक 3-4 महीने में खत्म हो जाती है, इसलिए धैर्य रखें।
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